Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

Coronavirus pandemic: लॉकडाउन के दौरान महाराष्ट्र में साइबर क्राइम में हुई 25% की बढ़ोतरी

लॉकडाउन के 2 हफ्तों के दौरान महाराष्ट्र में साइबर क्राइम में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली है।
अपडेटेड Apr 08, 2020 पर 09:11  |  स्रोत : Moneycontrol.com

लॉकडाउन के 2 हफ्तों के दौरान महाराष्ट्र में साइबर क्राइम में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली है। फ्री Netflix, सस्ता इंटरनेट और बेरोजगारी भत्ता कुछ ऐसे चारे है जिनके जरिए साइबर क्रिमिनल आपके पोन में घुसकर आपका डेटा चुरा रहे हैं या फिर आपका बैंक खाता खाली कर रहे हैं।


21 दिनों का यह लॉकडाउन कोरोना वयारस का चेन तोड़ने के लिए घोषित किया गया था। इस दौरान देश में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 4421 हो गई जबकि 114 लोगों की इस संक्रमण के चलते मौत हो गई।


इस लॉकडाउन के दौरान अधिकतर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं में कर्मचारियों की कमी हो गई क्योंकि सुरक्षा की दृष्टि से कर्मचारियों का घर पर रहना ही सुरक्षित था। इस दौरान ग्राहको ने बिल चुकाने, मनी ट्रासंफर करने यहां तक की डॉक्टरों से कसंल्ट करने के लिए इंटरनेट का सहारा लिया।


महाराष्ट्र साइबर क्राइम विभाग के एक सीनियर ऑफिसर ने मनीकंट्रोल से नाम ना बताने की शर्त पर  कहा कि लॉकडाउन की अवधि में महाराष्ट्र में  फिशिंग और साइबर धोखाधड़ी के मामलों में भारी बढ़त देखने को मिली है। सिर्फ महाराष्ट्र में पिछले 2 हफ्ते में साइबर क्राइम में 25 फीसदी की बढ़त हुई है।


बता दें कि महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के मामले भी देश में सबसे ज्यादा हैं। यहां अब तक कोरोना के  748 केस मिले हैं।


महाराष्ट्र साइबर क्राइम सेल के डिप्टी कमिश्नर बालसिंह राजपूत ने मनी कंट्रोल से कहा कि लॉकडाउन के दौरान फिशिंग केसों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली। इस दौरान हमारी वेबसाइट पर काफी ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई है।


कई तरीके से फिशिंग की जाती है। हैकरों द्वारा आपके पास कुछ ऐसे मैसेज भेजे जाते हैं जिसमें  फ्री Netflix, सस्ता इंटरनेट जैसे प्रलोभन होते है। इन ऑफर्स को एक्टिवेट करने के लिए आपको हैकर्स  द्वारा कंट्रोल वेबसाइट पर जाने और वहां पासवर्ड एंटर करने और अपनी संवेदनशील जानकारियां देने के लिए कहा जाता है। अगर हम हैकर्स के कहे अनुसार वो सारी जानकारियां इंटर कर देते हैं तो हैकर इन जानकारियों के बल पर आपके ई-मेल खाते सहित दूसरे खातों को भी हैक कर लेते हैं।


एक बड़े प्राइवेट बैंक में काम करने वाले आशिष सिंह हाल ही में अपने अनुभव और जानकारी के बल पर साइबर धोखाधड़ी से बच गए। आशिष सिंह ने मनी कंट्रोल से हुई बातचीत में बताया कि हाल ही में उन्हें एक ई-मेल आया जिसमें उनके आखिरी ट्रांजैक्शन का विवरण देते हुए अटैच किए गए स्टेटमेंट को डाउनलोड करने के लिए कहा गया था। आशिष सिंह ने बताया कि संयोग से उनको अपना अकाउंट बैलेंस याद था। इसके अलावा ई-मेल में दिया गया अकाउंट नंबर भी आशिष के अकाउंट नंबर से मेल नहीं  खा रहा था जिससे आशिष को संदेह हुआ और फिर उन्होंने अटैचमेंट को डाउनलोड नहीं किया।


आजकल लोग कई तरह के इंटरनेट आधारित एप्लीकेशन यूज कर रहे है। फिशर और साइबर क्रिमिनल लोगों के फोन से डेटा चुराने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं।


साइबर क्राइम विभाग से संबंधित एक अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि धोखाधड़ी करने वाले कई बार दूसरे देशों या देश के ही किसी दूसरे भाग से ही डार्क वेब के जरिए अपनी गतिविधियां चलाते हैं इसलिए इनको पकड़ना बहुत मुश्किल होता है। साइबर क्राइम विभाग को फिशिंग के अलावा अपवाहों, फर्जी खबरों, हेट स्पीच जैसे दूसरे अपराधों को भी रोकना होता है जिसके लिए डिपार्टमेंट वाट्सएप मैसेज, फेसबुक, इंस्ट्राग्राम स्टोरीज, टेलीग्राम पोस्ट और टिकटॉक वीडियो की स्क्रीनिंग करता रहता है।


सूत्रों के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान महाराष्ट्र में इस तरह के 100 से ज्यादा केस रजिस्टर किए गए हैं और 3 दर्जन से ज्यादा लोगों पर नजर रखी जा रही है।  राज्य में कोरोना वायरस से जुड़े  अफवाह और फेक न्यूज फैलाने के लिए 65 से ज्यादा केस दर्ज किए गए हैं।


एक अन्य पुलिस अधिकारी ने कहा कि एक तरफ जहां पुराने तरह के अपराध कम हो रहे हैं वहीं साइबर क्राइम में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सभी राज्य सरकारों को इस चुनौती का समाना करना पड़ रहा है।


(पहचान झुपाने के लिए नाम बदले गए है)





सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।