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दाल में कुछ काला, कॉरपोरेट गवर्नेंस के उठे सवाल

प्रकाशित Thu, 31, 2018 पर 14:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

घरेलू कंपनियों में कॉरपोरेट गवर्नेंस के उल्लंघन के मामले बढ़ते जा रहे हैं। वक्रांगी, पीसी ज्वेलर, गीतांजलि के बाद अब अटलांटा, मनपसंद बेवरेजेज और विजमैन फॉरेक्स पर सवालिया निशान लगे हैं। मनपसंद और अलांटा के ऑडिटर्स तो विजमैन के कंपनी सेक्रेटरी ने इस्तीफा दे दिया है। वक्रांगी और पीसी ज्वेलर में फंड डायवर्जन का मामला सामने आया जबकि गीतांजलि जेम्स नीरव मोदी मामले में फंस गई।


अटलांटा कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर घेरे में है। कंपनी के ऑडिटर प्राइस वाटरहाउस ने इस्तीफा दे दिया है। ऑडिटर का अटलांटा पर आरोप है कि कंपनी पूरी जानकारी नहीं दे रही है। साथ ही इनकम टैक्स के डिमांड नोटिस को लेकर जानकारी छुपाई गई है और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर का इस्तीफा भी सवालों के घेरे में है। वक्रांगी और मनपसंद बेवरेजेज के ऑडिटर ने भी इस्तीफा दिया है। मनपसंद बेवरेजेज के ऑडिटर डेलॉयट हास्किंस एंड सेल्स ने इस्तीफा दिया है।


वक्रांगी पर शेयरों की कीमतों में हेरफेर का आरोप है, और इसके बाद ऑडिटर प्राइस वाटरहाउस ने इस्तीफा दिया। पीसी ज्वेलर के प्रोमोटर ने रिश्तेदारों को शेयर गिफ्ट किए। साथ ही पीसी ज्वेलर पर वक्रांगी के साथ अघोषित कारोबारी रिश्तों का आरोप है।


इस मुद्दे पर सीएनबीसी-आवाज़ से बातचीत में आइकैन इन्वेस्टमेंट के अनिल सिंघवी ने कहा कि ऑडिटर्स का इस तरह इस्तीफा सही नहीं है और ऑडिटर्स का फर्ज शेयरधारकों को पूरी जानकारी देना है। एजीएम में पूरी जानकारी देने के बाद ही इस्तीफा देना चाहिए। ये इस्तीफे ऑडिट कमेटी की कमजोरी दर्शाते हैं। ऑडिटर पर शेयरधारकों को मुकदमा करना चाहिए। नए ऑडिटर पुराने मामले से पल्ला नहीं झाड़ सकते और नए ऑडिटर को पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी।