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कटघरे में योगी सरकार, क्या सोनभद्र हत्याकांड को रोका जा सकता था?

पिछले हफ्ते सोनभद्र में हुए हत्याकांड का ब्योरा जैसे जैसे निकल रहा है योगी सरकार के दावों पर सवाल खड़े होते जा रहे हैं।
अपडेटेड Jul 23, 2019 पर 11:17  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद दावा किया गया कि राज्य में अपराध कम हो रहा है। अपराधी खौफ खाने लगे हैं। लेकिन पिछले हफ्ते सोनभद्र में हुए हत्याकांड का ब्योरा जैसे जैसे निकल रहा है योगी सरकार के दावों पर सवाल खड़े होते जा रहे हैं। जिस संगठित तरीके से इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया, उसे देखकर लगता है कि इन अपराधियों को किसी का भी खौफ नहीं था।


इतना बड़ा हत्याकांड हो जाता है लेकिन मुख्यमंत्री को चार दिन बाद वहां जाने की फुरसत मिलती है। और वो भी तब जब उसके दो दिन पहले कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को वहां जाने से रोका गया और धारा 144 लगाई गई। सीधा सवाल ये है कि क्या सोनभद्र के हत्याकांड को रोका जा सकता था? और क्या ये हत्याकांड यूपी सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करता है?


ये दिन गांव वालों के लिए किसी आम दिन की तरह नहीं था। मूर्तिया गांव के बाहरी इलाके में सैकड़ों बीघा खेत है जिस पर गांव के आदिवासी लोग सालों से खेती कर रहे थे। इस जमीन का करीब 100 बीघा गांव के प्रधान यज्ञदत्त गुर्जर के नाम पर है जो उसने एक IAS अधिकारी से खरीदा था। इसी जमीन पर कब्जा करने के लिए यज्ञदत्त ने सुबह 11 बजे 200 से 300 लोग बुलवाए और खेत जोतने की कोशिश की। गांव वालों ने इसका विरोध किया तो गोलियों की बौछार हो गई जिसमें 10 लोग मारे गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रशासनिक अधिकारी 18 जुलाई की शाम को मृतकों के शव लेकर उम्भा गांव पहुंचे जिसे देखते ही पूरे गांव में कोहराम मच गया। शवों को दफनाने को लेकर प्रशासन और गावं वालों में विवाद हो गया। गांव वालों की मांग थी कि जहां हत्याकांड हुआ है शवों को उसी जमीन में दफनाया जाए।


मामले ने तब सियासी रंग ले लिया जब 19 जुलाई को कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा मृतकों के परिवार वालों से मिलने जा रही थीं लेकिन उन्हें बीच में ही रोक दिया गया। इलाकें में धारा 144 लागू कर दी गई। प्रियंका गांधी को पुलिस ने हिरासत में भी ले लिया। राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की सुध ली। वो 21 जुलाई को सोनभद्र पहुंचे और मृतकों के परिवार वालों से मिले। उन्होंने मृतकों के परिवार वालों को साढ़े 18 लाख रुपए और घायलों को ढाई लाख रुपए मुआवजा देने का एलान भी कर दिया। हालांकि वो इस पूरे हत्याकांड के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।


सोनभद्र हत्याकांड में अब तक गांव प्रधान समेत 29 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक कमिटी भी बनाई गई है। प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया और सोनभद्र हत्याकांड में हुई कार्रवाई का क्रेडिट लेने की कोशिश की। कांग्रेस इस हत्याकांड के लिए बीजेपी की तरफ इशारा कर रही है। बीएसपी यूपी में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सवाल खड़े कर रही है।


सोनभद्र हत्याकांड कई गंभीर सवाल खड़े करता है। एक जमीन का विवाद इतना बड़ा कैसे हो गया कि उसने हत्याकांड की शक्ल ले ली? ग्राम सभा के नाम पर दर्ज जमीन व्यक्तिगत लोगों के नाम पर ट्रांसफर कैसे हो गई? क्या दबंग प्रधान के दबाव में पुलिस प्रशासन ने आंखें मूंदे रखीं? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी में अपराध को काबू में करने का दावा कर रहे हैं। लेकिन क्या सचमुच में यूपी की जनता भी ऐसा महसूस करती है? या पुलिस एनकाउंटर और एंटी रोमियो स्क्वैड सिर्फ दिखावे की बात है और अपराधी अब भी बेखौफ घूम रहे हैं?