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COVID-19 की स्वदेशी वैक्सीन साल भर में नहीं आएगी, एक्सपर्ट्स का दावा

भारत में अभी वैक्सीन की खोज शुरुआती अवस्था में है। अभी ये एक साल में भी बनकर तैयार नहीं हो पाएगी
अपडेटेड May 25, 2020 पर 13:41  |  स्रोत : Moneycontrol.com

भारत में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से भारत भी कोरोना वायरस की वैक्सीन की खोज करने में जुटा हुआ है। लेकिन वैक्सीन खोजने के मामले में एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में अभी वैक्सीन की खोज शुरुआती अवस्था में है। अभी ये एक साल में भी बनकर तैयार नहीं हो पाएगी।


PM CARES Fund Trust ने वैक्सीन बनाने के लिए 100 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता करने की घोषणा कर चुका है। पीएम मोदी ने भी देश में वैक्सीन बनाने के लिए जोर दिया है। इसके लिए सरकार की तरफ पूरी कोशिश की जा रही है।


सरकार ने वैक्सीन बनाने के लिए वायोटेक्नोलॉजी विभाग (Department of Biotechnology) नोडल एजेंसी बनाया है। पिछले महीने इस बात की जानकारी मिली थी कि देश में जायड्स कैडिला (Zydus Cadila) दो वैक्सीन मॉड्यूल पर काम कर रही है। जबकि, सीरम इंस्टीट्यूट (Serum Institute), बायोलॉजिकल्स-ई (Biological E), भारत बायोटेक (Bharat Biotech) और इंडियन इम्युनोलॉजिकल्स (Indian Immunologicals) एक-एक वैक्सीन मॉड्यूल के विकास पर काम कर रहे हैं।


WHO ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India), जायड्स कैडिला (Zydus Cadila), इंडियन इम्युनोलॉजिकल्स लिमिटेड (Indian Immunologicals Limited) और भारत बायोटेक (Bharat Biotech) को वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों की लिस्ट में जगह दी है।


 देश के लीडिंग वायरोलॉजिस्ट (virologist) शाहिद जमील (Shahid Jameel) ने कहा कि भारत की वैक्सीन बनाने की क्षमता काफी उल्लेखनीय है। कम से कम तीन कंपनियां इसके निर्माण के लिए आगे आई हैं। उन्होंने अपने बयान में आगे कहा कि भारत में कोरोना वैक्सीन को लेकर रिसर्च अभी शुरुआती अवस्था में है। जानवरों के ऊपर परीक्षण तक करने में अभी कम से कम इस साल का आखिरी तक का समय लग जाएगा। शाहिद ने आगे कहा कि हालांकि भारतीय वैक्सीन कंपनियों की क्षमता और विशेषज्ञता बहुत ज्यादा है और वो मार्केट में नई कोविड-19 वैक्सीन लाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।


CSIR-Centr for Cellular & Molecular Biology (CCMB) के डायरेक्टर राकेश मिश्रा (Rakesh Mishra) का कहना है कि बहुत सारी भारतीय कंपनियों ने विदेशी संस्थानों से गठबंधन किया है। अन्य देश हमसे कहीं ज्यादा एडवांस स्टेज पर हैं। कुछ परीक्षण के तीसरे चरण तक पहुंच चुके हैं। भारत में अभी तक कोई कंपनी वैक्सीन की टेस्टिंग स्टेज में नहीं है और वे तैयारी की प्रि-क्लीनिकल स्टेज (pre-clinical stage) पर ही चल रहे हैं।


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