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COVID impact: बैंक घर खरीदारों के लिए अपनी झोली खोलने की जल्दबाजी में नहीं

बैंक लोन की अमाउंट में कटौती करके अपने क्रेडिट जोखिम को घटाने की कोशिश कर सकते है।
अपडेटेड Jun 23, 2020 पर 10:34  |  स्रोत : Moneycontrol.com

रियल एस्टेट की कीमतों में हो रही गिरावट घर खरीदारों के लिए एक उम्मीद की किरण हो सकती है लेकिन चीजें उतनी आसान नजर नहीं आती।


बैंकिंग इंडस्ट्री के जानकारों ने मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में कहा कि बैंक अपने लोन वितरण नीति में कड़ाई ला सकते हैं।  बैकों की इस नीति से होम और टॉपअप लोन लेना आसान नहीं रह जायेगा। इसके लिए मुख्यत: 2 कारण जिम्मेदार हैं। पहला कारण यह है कि कोवि़ड-19 के चलते एक औसत कर्जदार की  कर चुकाने की क्षमता पर बुरा असर पड़ा है। दूसरी वजह है कि कई मामलों में लोन लेकर खरीदी गई प्रॉपर्टी की कीमतें भी गिरी हैं।


सामान्य तौर पर किसी संकट की स्थिति में बैंक अपनी लोन देने की गतिविधि को धीमा कर देते हैं। ट्रांसयूनियन सिबिल क्रेडिट आउटलुक (TUCIBIL) की जून 2020 में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक वित्तीय संकट की वजह से वित्त वर्ष 2008 की दूसरी तिमाही और वित्त वर्ष 2009 की पहली तिमाही के बीच बैंकों की तरफ से होम लोन को दी जा रही मंजूरियों में 16 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी। हमको  COVID-19 की बाद की दुनिया में फिर एक बार कुछ ऐसा ही देखने को मिल सकता है।


होम लोन की मंजूरियों के अलावा 2020 में होम लोन की मांग में भी कमजोरी देखने को मिलेगी।


एक बैंकर ने पहचान ना बताए जाने की शर्त पर कहा कि  होम लोन रेपो रेट से लिंक है जबकि बैंकों के फंड की कास्ट के साथ ऐसा नहीं है। इसलिए किसी खास समय बिंदु पर बैंक एक्सटर्नल बेंचमार्क पर अपने स्प्रेड को बढ़ा देंगे। यह नए लोनों पर लागू होगा क्योंकि पहले से लिए गए लोन कॉन्ट्रेक्ट पर ब्याज की मात्रा 3 साल के लॉक्ड है।TUCIBIL ने भी इस तरफ संकेत किया है कि लोअर इंटरेस्ट रेट और मार्जिन में गिरावट इस समय बैंकों के लिए मुश्किल बन रहे हैं।


RetailLending.com के सुकन्या कुमार का कहना है कि मंद पड़ती इकोनॉमी और प्रॉपर्टी की गिरती कीमतों के बीच बैंक लोन देने के मामले में फूंक-फूंक कर कदम उठाएंगे। अगर आप कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टर जैसे एविएशन, टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी से संबंधित है तो बैंक आपको लोन देने से मना कर सकते है या फिर किसी को-बॉरोवर का इंतजाम करने को कह सकते हैं।


Paisabazaar.com के सीईओ नवीन कुकरेजा ने कहा कि नए लोन से जुड़े जोखिम को देखते हुए बैंक लोन अमाउंट में कटौती कर सकते हैं। बैंक कर्ज लेने वाले के क्रेडिट प्रोफाइल को देखते हुए अपने क्रेडिट जोखिम को घटाने के लिए लोन टू वैल्यू रेश्यों (LTV) अथवा EMI इनकम रेश्यो को घटा सकते हैं। उदाहरण के लिए 50 लाख रुपये की किसी प्रॉपर्टी के लिए बैंक होम लोन के लिए 40 लाख रुपये (80% LTV) तक ऑफर करते हैं। हालांकि COVID के बाद की स्थिति में बैंक LTV में कटौती कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि प्रॉपर्टी की खरीद के लिए आपको अपनी जेब से ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है।


अधिकांश बैंक कर्ज लेने वाले की टेक होम इनकम के 30 फीसदी भाग तक के ईएमआई (EMI) को अपने लिए सुविधाजनक समझते हैं लेकिन  COVID के बाद की स्थिति में यह अनुपात बढ़कर 50 फीसदी तक जा सकता है। अब होम लोन लेने के मामले में आपके क्रेडिट स्कोर की भी बड़ी भूमिका होगी।


बैकरों ने इस बातचीत  में आगे कहा कि वर्तमान स्थितियों में हम सिर्फ वर्तमान क्रेडिट स्कोर पर निर्भर नहीं रह सकते। अब हमें यह भी देखना होगा कि पिछले 1 साल में कर्ज लेने वाले के क्रेडिट स्कोर में किस तरह के बदलाव हुए हैं। तो इस चीज को ध्यान में रखते हुए आप अपने लोन और क्रेडिट कार्ड के कर्ज को समय से चुकाएं और अपना क्रेडिट स्कोर अच्छा  बनाए।


निर्माणाधीन घरों को लेकर मुश्किलें कुछ ज्यादा हो सकती हैं। TUCIBIL का कहना है कि हमें निर्माणाधीन घरों पर लिए गए लोन में आगे नॉन पेमेंट के मामले देखने को मिल सकते हैं। कीमतों में होनेवाली गिरावट कई खरीदारों को असमंजस की स्थिति में डाल सकती है जिसको देखते हुए बैंक इस स्थिति से बचने की कोशिश करेंगे। निर्माणाधीन घरों के बनने में होनेवाली देरी भी एक जोखिम है। अगर आप किसी निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में घर लेना चाहते हैं तो अपने पसंद की बैंक में जाकर यह जांच करें कि वह इस तरह की प्रॉपर्टी पर लोन देगा कि नहीं। इस बात की संभावना है कि बैंक उसी प्रॉपर्टी पर लोन देने को वरियता देगें जो रेडी टू मूव होंगे।


अगर आप घर खरीदनें जा रहे है तो बैंकों ने COVID के पहले जो कुछ कहा था अब उस बात पर निर्भर ना रहें। किसी भी प्रॉपर्टी का सौदा करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि क्या बैंक का अभी अपने पहले के लोन अप्रूवल लेटर पर कायम है। अपना क्रेडिट रिपोर्ट निकालकर देखें और उसमें कोई कमी हो तो उसे दूर करें। अगर आपने किसी वर्तमान लोन पर मोरेटोरियम ले रखा है तो आपके लोन एप्लीकेशन को देखते समय बैंक आपको लेकर कुछ ज्यादा ही सतर्क नजरिया अपनाएगा। अपने लोन और क्रेडिट कार्ड के बकाया पेमेंट को समय पर चुकाएं। 




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