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शहर छोड़कर गांव लौटे प्रवासी मजदूरों की शहर वापसी की रफ्तार बढ़ी

देश के कई हिस्सों में बाढ़ की वजह से हालात बेहद खराब हैं। फसल बर्बाद हो चुकी है और मनरेगा का काम भी ठप पड़ गया है।
अपडेटेड Aug 11, 2020 पर 08:20  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

देश के कई हिस्सों में बाढ़ की वजह से हालात बेहद खराब हैं। फसल बर्बाद हो चुकी है और मनरेगा का काम भी ठप पड़ गया है। ऐसे में शहर छोड़कर गांव लौटे प्रवासी मौजदूरों की वापसी की रफ्तार बढ़ गई है। त्योहारी सीजन से पहले मजदूरों की वापसी इंडस्ट्री के लिए बड़ी राहत की खबर है।


बाढ़ ने बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, आंध्रप्रदेश, केरल, कर्नाटक हर तरफ तबाही मचा रखी है ऐसे में कोरोना के डर से गांव लौटे प्रवासी मजदूरों के सामने संकट पैदा हो गया है।


मजदूर अब शहरों की तरफ लौटने लगे हैं। लेबर की कमी से जूझ रही इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि त्योहारों के बाद मजदूर वापस आएंगे पर अभी ही करीब 30-35 फीसदी वापस आ चुके हैं और अभी और लोग वापस आने की जुगत लगा रहे हैं।


Okhla Industries Assocciation के  महासचिव वाई सी जैन ने कहा कि मजदूर लौटने लगे हैं। क्योंकि गांवों में उन्हें काम नहीं मिल रहा। बाढ़ की वजह से वो लोग फंस गए हैं। हमारे पास मजदूरों के काफी फोन आ रहे हैं, वो काम के बारे में पूछ रहे हैं। कुछ लोग बस से बुला रहे हैं। चिंता की बात ये है कि अभी भी डिमांड 50-60 फीसदी ही है।


एक तो डिमांड कम है ऊपर से 7 से 14 दिन कोरेंटीन में भी रखने के निर्देश हैं लिहाजा फैक्ट्री मालिक ही मजदूरों को बुलाने से कतरा रहे हैं। मतलब काम का भरोसा नहीं है ऊपर से ट्रांसपोर्टेशन की दिक्कते भी हैं। प्रवासी मजदूरों के लिए कई योजनाओं की घोषणा सरकार ने की है लेकिन घोषणाएं जल्दी जमीन पर नहीं उतरीं तो बेकार साबित होंगी।


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