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मर्जर से ग्राहक और बैंक दोनों का होगा फायदा: राजीव कुमार

फाइनेंस सेक्रेटरी राजीव कुमार ने कहा कि बैंकों के मर्जर से ग्राहक और बैंक दोनों का फायदा होगा।
अपडेटेड Sep 01, 2019 पर 16:37  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बैंकों के मर्जर पर CNBC-आवाज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत में फाइनेंस सेक्रेटरी राजीव कुमार ने कहा कि बैंकों के मर्जर से ग्राहक और बैंक दोनों को फायदा होगा और सभी बैंकों के NPAs में कमी आयेगी।


मर्जर के पीछे क्या सोच? इस सवाल पर फाइनेंस सेक्रेटरी का कहना है कि सरकार का फाइनेंशियल सेक्टर की सेहत सुधारने पर जोर है। NPA रिकवरी होने से बैंकों का मुनाफा बढ़ा है। सरकार का फोकस ग्राहकों को अच्छी सुविधा देने पर है और अच्छी सुविधा देने के लिए खर्चे कम करने होंगे। बैंकों के मर्जर से ग्राहक, बैंक दोनों को फायदा होगा। बैंकों के मर्जर से इकोनॉमी में ग्रोथ बढ़ेगी।


मर्जर के चयन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सोच समझकर बैंकों का मर्जर किया गया है। टेक्नोलॉजी, पूंजी के आधार पर बैंकों को मर्जर किया गया है। उन्होंने बताया है कि मर्जर के चयन के लिए निवेश की क्षमता को भी ध्यान में रखा गया है।


मर्जर के बाद बैंकों का पैमाना कितना मिलेगा? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि नियम के मुताबिक CET 1 कैपिटल 7% होना चाहिए। CRAR 10.875% होना जरूरी है और NNPA 6% कम होने चाहिए।


फाइनेंस सेक्रेटरी का कहना है कि बैंकों को बोर्ड से Assesment करने का कहा गया है। बैंकों की जरूरत के आधार पर पूंजी मिलेगी। बैंकों के PCA से बाहर आने की कितनी संभावना है? इस सवाल पर उनका कहना है कि बैंकों की PCA से बाहर आने की संभावना प्रबल है। पूंजी देने से PCA में बैंकों की सेहत सुधरेगी। PCA से बाहर निकलने के बाद ग्रोथ बढ़ेगी।


बैंकों के मर्जर की पूरी प्रक्रिया पर बात करते हुए फाइनेंस सेक्रेटरी ने कहा कि मर्जर की प्रकिया में 6 महीने लगेंगे। मर्जर से बैंक के कामकाज पर असर नहीं पड़ेगा। पूंजी देते ही सेहत में सुधार देखने को मिलेगा।


मर्जर के बाद क्या कर्मचारियों छंटनी होगी? इस सवाल पर उनका कहना है कि किसी भी बैंक कर्मचारी की छंटनी नहीं होगी। बैंक की क्षमता बढ़ने से कर्मचारी अपना ट्रांसफर करा सकते हैं। मर्जर होने से हर बैंक कर्मचारी को फायदा होगा। छंटनी और सोतेले व्यवाहर की संभावना नहीं होगी।


आगे भी ऐसे मर्जर होगें इस पर बात करते हुए फाइनेंस सेक्रेटरी ने कहा कि किसी और बैंक के आगे मर्जर होने की संभावना नहीं है। गवर्नेंस रिफॉर्म के पीछे की सोच पर बात करते हुए राजीव कुमार का कहना है कि इससे बैंक बोर्ड को खुलकर काम करने की आजादी मिलेगी। गवर्नेंस रिफॉर्म से बोर्ड को Assesment करने की पावर मिली और Chief Risk Officer बाहर से लेकर आए।


NBFCs एसेट के गाइडलाइंस पर बात करते हुए फाइनेंस सेक्रेटरी ने कहा NBFCs के एसेट पर सरकार ने गाइडलाइंस जारी है। सरकार ने 3000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट सेंकेंशन किए है। अच्छे एसेट पर लोन दिया जाएगा।


बैंक फ्रॉड का जिम्मेदान कौन? इस सवाल पर फाइनेंस सेक्रेटरी राजीव कुमार का कहना है कि बैंक फ्रॉड को लेकर सरकार के Proactive फैसले ले रही है। फ्रॉड की जांच करने के बैंकों को आदेश दिए गए है। गलतियों को छुपाया नहीं जाएगा।


वहीं रेपो रेट से जुड़े लोन पर फाइनेंस सेक्रेटरी राजीव कुमार ने कहा कि RBI के ब्याज दर घटाने से रेपो लिंक लोन से कर्ज लेने वालों को तुरंत फायदा मिलेगा। RBI दरें घटाएगा तो रेपो लिंक्ड लोन तुरंत सस्ता होगा। अभी ब्याज दर ग्राहकों को पास करने में समय लगता है।


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