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चीन से आयात पर कस्टम क्लियरेंस में देरी, सप्लाई चेन टूटने से इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम की लागत बढ़ेगी

कोरोना संकट में चीन के साथ सीमा विवाद के बीच कस्टम क्लियरेंस पर सख्ती ने इंडस्ट्री की मुश्किलें बढ़ा दी है।
अपडेटेड Jul 01, 2020 पर 13:19  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कोरोना संकट में चीन के साथ सीमा विवाद के बीच कस्टम क्लियरेंस पर सख्ती ने इंडस्ट्री की मुश्किलें बढ़ा दी है। बंदरगाहों पर कस्टम क्लियरेंस में देरी से कंपनियों की लागत कॉस्ट बढ़ जाएगी। लागत बढ़ने से कस्टमर को भी उत्पादों पर ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।


SPL Industries के डायरेक्टर विजय जिंदल धीरे-धीरे ऑर्डर में आ रही तेजी से कहां तो लॉकडाउन के घाटे से उबरने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन अब सप्लाई चेन टूटने से जो एक्सपोर्ट ऑर्डर हाथ में है उसके भी निकलने का डर उन्हें सताने लगा है। दरअसल घरेलू गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री पैकिंग, प्राइस लेबल, प्रिंट कलर्स के लिए आज भी पूरी तरह चीन पर निर्भर हैं। लेकिन चीन, ताइवान, हॉन्ग-कॉन्ग से आयात पर सख्ती से घरेलू गारमेंट कंपनियों की इनपुट कॉस्ट 5 से 10 फीसदी तक बढ़ सकती है।


ये हाल सिर्फ गारमेंट सेक्टर का ही नहीं है बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स गुड़्स, MSME,एग्रीकल्चर सबकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जहां तक इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम की बात है तो सप्लाई चेन बाधित होने से चार्जर, ईयर फोन, डिस्प्ले, पावर बैंक, स्पीकर जैसे एसेसरीज पर कीमतें अभी ही 10 फीसदी तक बढ़ गई हैं। MSME मंत्री नितिन गडकरी ने तो कस्टम क्लियरेंस में देरी के मसले पर वित्त और कॉमर्स मिनिस्ट्री को चिट्ठी भी लिखी है।


नितिन गडकरी ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि पोर्ट्स पर माल रोकने से ज्यादा नुकसान डोमेस्टिक इंडस्ट्री को ही होगा क्योंकि हमारे कारोबारियों ने उस शिपमेंट के लिए पेमेंट कर दिया है। अभी एग्रीकल्चर इक्विपमेंट को प्राथमिकता देने की जरूरत है। सरकार का फोकस इंपोर्ट कम करके मेक इन इंडिया को बढ़ाने पर होना चाहिए। जाहिर है सरकार के सामने इस समय चीन को सबक देने के साथ-साथ डोमेस्टिक इंडस्ट्री को बचाने की दोहरी मुश्किल है। लेकिन चुनौती बड़ी है और विकल्प बेहद कम।




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