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दिल्ली की हवा और हुई जहरीली, हेल्थ इमरजेंसी घोषित की गई

गैस चेंबर बने दिल्ली-NCR को अभी राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं।
अपडेटेड Nov 03, 2019 पर 15:23  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

गैस चेंबर बने दिल्ली-NCR को अभी राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। दिल्ली की हवा आज और भी जहरीली हो गई है। दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर 480 है जोकि बहुत ज़्यादा ख़तरनाक है। दिल्ली के आनंद विहार, नरेला, वज़ीरपुर समेत कई इलाकों में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है। प्रदूषण बढ़ने की वजह से लोगों को सांस लेने में परेशानी आ रही है। प्रदूषण की वजह से दिल्ली में कई जगह धुंध छाई है जिससे विजिबिलिटी काफी कम हो गई है। सड़कों पर कोहरा छाने से गाड़ी चलाने वाले लोगों को दिन में ही हेडलाइट जलानी पड़ रही है। दिल्ली-NCR की हवा में प्रदूषण की बड़ी वजह आसपास के राज्यों में पराली जलना है।


पंजाब के मानसा में किसान लगातार विरोध करते हुए पराली जला रहे हैं। सिर्फ मानसा में ही पिछले 72 घंटों में 1000 से ज्यादा पराली जलाने के मामले सामने आ चुके हैं। किसान अपने किसान संगठनों की गाड़ियों पर सवार होकर आते हैं और फिर जिस किसान का खेत होता है उस किसान के साथ मिलकर खेत में पराली को आग लगा देते हैं। इन किसान संगठनों के मुताबिक अगर सरकार उनको पराली का समाधान करने के लिए खरीदे जाने वाले ट्रैक्टर और दूसरे जरूरी औज़ारों के लिए सही सब्सिडी दे।
 
दिल्ली की हवा बेहद खऱाब हो गई है और इस वजह से हेल्थ इमर्जेंसी लग गई है। सरकार से लेकर प्रदूषण पर नजर रखने वाली एजेंसियों ने कड़ा एक्शन लिया है।  बावजूद इसके सियासत थम नहीं रही। पॉल्यूशन की राजनीति में आम लोगों की सांसे बुरी तरह से फूलने लगी है।


बच्चे, जवान, बुजुर्ग दिल्ली में प्रदूषण ने सबको अपनी गिरफ्त में ले लिया है। लोगों ने एयर फिल्टर मास्क से दोस्ती कर ली है। ऐसा लग रहा है जैसे अब मास्क लगाए बिना गुजारा नहीं होने वाला। हालात इतने खराब हो गए हैं कि दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स 500 के पार चला गया है। नोएडा में ये 600 के पार है, यानि हवा का बेहद खतरनाक स्तर।


हालात बिगड़ते देख पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण यानि EPCA ने दिल्ली-NCR में हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। 5 नवंबर तक सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। सभी तरह के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा अगले आदेश तक पटाखे जलाने पर भी रोक लगा दी गई है।


प्रदूषण से निपटने के लिए बैठकों का दौर चल रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्लीवालों को मास्क बांट रहे हैं। सोमवार से दिल्ली में ट्रैफिक के लिए ऑड इवन सिस्टम भी लागू हो रहा है। लेकिन दिल्ली की हवा में बढ़ते जहर पर सियासत भी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने केजरीवाल सरकार के ऊपर प्रदूषण पर राजनीति करने का आरोप लगाया। केजरीवाल सरकार दिल्ली में बढ़ते पॉल्यूशन का ठीकरा पंजाब, हरियाणा में जलने वाली पराली पर फोड़ रही है। साथ ही बीजेपी से जवाब भी मांग रही है। प्रदूषण का साया क्रिकेट मैच पर भी पड़ रहा है। बांग्लादेश क्रिकेट टीम मास्क लगाकर मैदान में प्रैक्टिस करती दिखी। बांग्लादेश टीम के कोच भी कह रहे हैं कि मैच के लिए हालात ठीक नहीं हैं।


केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है कि 2016 से 2018 के बीच दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने में 41 प्रतिशत की कमी आई है। साथ ही दिल्ली NCR में प्रदूषण के पीछे पराली का जलाना सबसे बड़ा कारण है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पराली जलाने के मामले में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। सवाल ये है कि आखिर दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार या दिल्ली के पड़ोसी राज्य? क्या पराली और पटाखे जलने की वजह से ही अचानक प्रदूषण बढ़ गया या इसके पीछे और भी कारण हैं? जहरीली हवा लोगों की सासों में घुल रही है और सरकारें एक दूसरे पर आरोप लगा रही हैं? क्या अब वक्त आ गया है कि सरकारें राजनीति बंद करके एक ऐसा प्लान बनाएं जिससे पॉल्सूशन को खत्म करने का असली सॉल्यूशन निकले।


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