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ग्रोथ घटने के बावजूद दरों में कटौती नहीं, आने वाले बजट और महंगाई पर नजर

इसका मतलब रेट कट का दौर थमा नहीं है, बल्कि रिजर्व बैंक ने छोटा सा ब्रेक लिया है।
अपडेटेड Dec 06, 2019 पर 10:16  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लगातार पांच बार दरें घटाने के बाद इस बार रिजर्व बैंक ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि RBI ने साफ किया है कि दरों में आगे कटौती होने की संभावना बनी हुई है। इसका मतलब रेट कट का दौर थमा नहीं है, बल्कि रिजर्व बैंक ने छोटा सा ब्रेक लिया है। रिजर्व बैंक को घटती ग्रोथ रेट की चिंता है लेकिन उसकी नजर आगे वाले बजट और महंगाई दरों में बढ़ोतरी पर भी है। पॉलिसी में बात ग्राहकों के हितों की भी हुई है। RBI गवर्नर ने बैंकों को साफ-साफ कहा है कि अब तक हुई रेट कटौती का फायदा ग्राहकों को नहीं पहुंचाया गया है। मतलब साफ है कि रेट कट तो होगा लेकिन अभी थोड़ा इंतजार करना होगा।


आरबीआई के इस निर्णय पर इस शो में सीएनबीसी-आवाज़ के साथ चर्चा के लिए Kotak Mahindra Bank की Vice President उपासना भारद्वाज, Thermax Limited के MD, एमएस उन्नीकृष्णन और मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा जुड़ गये हैं। इस चर्चा को आगे बढ़ाने के पहले जान लेते हैं कि आखिर रेट कट को लेकर रिजर्व बैंक थोड़ा इंतजार क्यों करना चाहता है।


इस मुद्दे पर RBI गवर्नर ने कहा कि सरकार और RBI ने कई कदम उठाए हैं लेकिन उठाए गए कदमों का असर होना बाकी है। अब तक दरों में 135 बेसिस प्वाइंट कटौती हो चुकी है जबकि पिछली कटौती का फायदा अब तक नहीं मिला है हालांकि आगे दरों में कटौती की गुंजाइश बरकरार है।


दरों में कटौती भले ही नहीं हुई हो लेकिन RBI को ग्रोथ की भी चिंता सता रही है। जब सीएनबीसी-आवाज़ ने RBI गवर्नर से ग्रोथ पर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि सरकार और RBI का ग्रोथ रिवाइवल पर फोकस बना हुआ है। इसको लेकर सरकार और RBI के बीच बेहतर तालमेल है। उन्होंने कहा कि Q2, Q3 में Fiscal Deficit ज्यादा रहता है क्योंकि रेवेन्यू फ्लों बढ़ने से Q2, Q3 में Fiscal Deficit ज्यादा नजर आया है। इसके बाद सरकार के नए कदमों पर नजर बनी रहेगी।


RBI के नो रेट कट पर अपनी राय व्यक्त करते हुए मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा ने कहा कि RBI के इस निर्णय से बाजार निराश और आश्चर्यचकित हुआ है। ज्यादातर लोगों को लग रहा था कि अबकी रेट कट जरूर होगा और इसके बाद शायर फरवरी महीने में रेट कट नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा इससे लगता है कि कहीं आरबीआई के पास ऐसे कुछ आंकडे तो नहीं जिससे लगता है कि फिस्कल स्लिपेज और खराब होने वाले हैं क्योंकि टैक्स रिवन्यू तो बदतर होने की उम्मीद है।


Thermax Limited के MD, MS Unnikrishnan का कहना है कि आरबीआई गवर्नर का ये कहना कि दरों में और कटौती की जा सकती है लेकिन ये कटौती का सही समय नहीं है, अपने में सही है। क्योंकि आरबीआई ने अभी तक जो कटौती की है उसका अभी तक पूरा ट्रांसमिशन नहीं हुआ है। जब तक उसका अधिकतम ट्रांसमिशन नहीं होगा और कटौती का कोई फायदा नहीं होगा।


Kotak Mahindra Bank की Vice President, Upasna Bhardwaj का कहना है कि हमें उम्मीद थी की आरबीआई रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती करेगा। लेकिन आरबीआई का मेन फोकस महंगाई पर है इसलिए दरें और नहीं घटाई गईं। एमपीसी ने ये नहीं बोला है कि आगे रेट कट नहीं होगा। अगर आगे ऐसा लगता है कि पिछली कटौतियों का सही ट्रांसमिशन हो गया है और महंगाई निर्धारित सीमा में रहेगी तो दरों में और कटौती देखने को मिल सकती है।


Kotak AMC की लक्ष्मी अईयर का मानना है कि RBI बैंकों को ये संदेश देना चाहता है कि रेट कट का फायदा ग्राहकों तक जल्द से जल्द पहुंचे। RBI के पास दरों में और कटौती की संभावना कम हुई है। RBI को रेट घटाने के ट्रांसमिशन की भी चिंता है। बैंकों को अब ब्याज दरें घटानीं चाहिए। महंगाई पर भी RBI की नजर है।


वहीं बैंकों का कहना है कि RBI दरों में कटौती के मुताबिक ट्रांसमिशन हुआ है। SBI के MD दिनेश कुमार खारा का कहना है कि लेंडिंग रेट पर बैंक अपने जोखिम भी जोड़ते हैं। साथ ही उन्हें आगे लोन ग्रोथ बेहतर होने की उम्मीद है। RBI पॉलिसी के मुताबिक ट्रांसमिशन की कोशिश हुई है। 135 bps कटौती के मुकाबले 49 bps ट्रांसमिशन हुआ है। सरकार खर्च पर कदम उठा रही है। PSU बैंकों से लेंडिंग पर सरकार के फोकस से लोन ग्रोथ संभव है।


 


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