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लॉकडाउन में ढील के बाद भी बढ़ीं मुश्किलें, कई फैक्ट्री मालिक बंद करना चाहते हैं कामकाज

लॉकडाउन में ढील के बाद इंडस्ट्री ने काम शुरू तो कर दिया है लेकिन लेबर के साथ-साथ डिमांड-सप्लाई की बड़ी चुनौतियां अब उनके सामने खड़ी है।
अपडेटेड May 11, 2020 पर 17:12  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लॉकडाउन में ढील के बाद इंडस्ट्री ने काम शुरू तो कर दिया है लेकिन लेबर के साथ-साथ डिमांड-सप्लाई की बड़ी चुनौतियां अब उनके सामने खड़ी है। जिन लोगों ने फैक्ट्री शुरू की है अब फिर से बंद करने की सोच रहे हैं। क्या हैं मौजूदा हालात, देखिए ये ग्राउंड रिपोर्ट।


पंजाब के नरेश भारद्वाज ने लॉकडाउन में ढील मिलते ही अपनी फैक्ट्री शुरू कर दी। उनकी फैक्ट्री लुधियाना में है और वो नट-बोल्ट के साथ स्टील के प्रोडक्ट बनाते हैं। कुछ वर्कर के साथ जैसे-तैसे काम तो शुरू कर दिया पर अब रॉ मटेरियल की कमी आड़े आ गई है। 10 दिनों का स्टॉक खत्म होने को है और जिन दूसरे राज्यों से कच्चा माल आता है वहां रिस्ट्रिक्शन की वजह से सप्लाई चेन टूट चुकी है।


यही हाल लुधियाना में अपनी फैक्ट्री शुरू करने वाले संजीव मंगत का भी है। होलसेल की दुकानें बंद हैं और ट्रांसपोर्टर दूसरे राज्यों में कम माल ले जाने को तैयार नहीं हैं।


लेबर कॉस्ट बढ़ता जा रहा है और पेमेंट पिछले ढाई महीनों से फंसा है। ऊपर से नए माल की डिमांड नहीं होने से दुविधा में फंसे कारोबारी फैक्ट्री फिर से बंद करने का विचार कर रहे हैं।
 
वैसे तो लोन पर तीन महीने के मोराटोरियम का फायदा मिलने से लिक्विडिटी की दिक्कत कुछ कम हुई है पर उतनी नहीं कि वर्किंग कैपिटल की जरूरतें पूरी हो जाये। जाहिर है कारोबार को पटरी पर लाने के लिए सरकार से और राहत की उम्मीदें की जा रही है।


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