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ई-कॉमर्स में खत्म होगा डिस्काउंट का सफर, सरकार कसेगी कंपनियों की कमान

ग्राहकों को ई कॉमर्स कंपनियों की फ्रॉड और मनमानी से बचाने के लिए सरकार ने ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की है।
अपडेटेड Nov 14, 2019 पर 13:19  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

ग्राहकों को ई कॉमर्स कंपनियों की फ्रॉड और मनमानी से बचाने के लिए सरकार ने ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की है। कंज्यूमर प्रोटेक्शन रूल्स पर सरकार ने 16 दिसंबर तक सभी स्टेकहोल्डर्स से राय मांगी है ताकि इसे जल्द लागू करके डीप डिस्काउंटिंग और प्रीडेटरी प्राईसिंग जैसे मुद्दों पर शिकंजा कसा जा सकें।


कंज्यूमर प्रोटेक्शन गाइडलाइंस के तहत हद से ज्यादा डिस्काउंट और कम कीमत की निगरानी की जायेगी। नए गाइडलाइंस के बाद ई-कॉमर्स कंपनियां कीमतें तय नहीं कर पाएंगी। अब कंपनियों को शिकायत अधिकारी की भी नियुक्ती करनी होगी।


ई कॉमर्स कंपनियों शिकायत अधिकारी की जानकारी अपनी वेबसाइट पर देंगी और इन कंपनियों को 1 महीने में अंदर ही ग्राहकों की शिकायतों का निपटारा करना होगा। शिकायत दूर करने का मैकेनिज्म बनाना होगा। ग्राहकों को 14 दिन में पूरा रिफंड मिल सकेगा। साथ ही कंज्यूमर प्रोटेक्शन गाइडलाइंस के तहत कंपनियां प्रोडक्टस की फेक रिव्यू नहीं कर पाएंगी। प्रोडक्टस बेचने वाले विक्रेता की जवाबदेही तय होगी।  


सेल का महाखेल
 
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भारी सेल मिलता है। फेस्टिवल के दौरान सेल के ढ़ेरो ऑफर दिए जाते है। इस सेल से अमेजॉन-फ्लिपकार्ट जैसे ई कॉमर्स कंपनियों ने दिवाली पर बिक्री का रिकॉर्ड बनाया। कंपनियां सेल के प्रचार पर भी खूब पैसे खर्च करती है।


भारी डिस्काउंट पर नजर


सरकार की नजर पहले से ही भारी डिस्काउंट पर थी। पीयूष गोयल ने पहले ही ई-कॉमर्स कंपनियां भारी डिस्काउंट को लेकर बयान दिया था कि कुछ ई-कॉमर्स कंपनियां भारी डिस्काउंट देती हैं जिससे छोटे कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ता है। उनका कहना था कि ई-कॉमर्स कंपनियों को नियम मानने चाहिए।


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