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भारतीय कंपनियों की रेटिंग में और गिरावट की आशंका: S&P Global

S&P Global Ratings के एनालिस्ट नील गोपाल कृष्णऩ ने कहा कि अगर आर्थिक सुस्ती लंबे समय तक रहती है तो कंपनियों की रेटिंग्स को और नीचे जाने का जोखिम बना रहेगा
अपडेटेड Jun 24, 2020 पर 17:53  |  स्रोत : Moneycontrol.com

रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स (S&P Global Ratings) ने बुधवार को कहा है कि अगर कॉरपोरेट अर्ऩिंग्स (corporate earnings) में रिकवरी 18 महीने से ज्यादा हो जाती है तो भारत की कंपनियों को अपनी रेटिंग में और गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।


S&P Global Ratings ने अपने बयान में कहा है कि भारतीय कंपनियों की करीब 35 फीसदी क्रेडिट रेटिंग या तो नेगेटिव आउटलुक है नकारात्मक दृष्टिकोण के साथ क्रेडिट वॉच में डाला गया है। रेटिंग एजेंसी ने ये भी कहा कि अगर IT सेक्टर में कर्ज मुक्त कंपनियों को छोड़ देते हैं तो एक-से दो रेटिंग तक बढ़ जाती है।


एसएंड पी ग्लोबल रेटिंग्स (S&P Global Ratings) के क्रेडिट एनालिस्ट नील गोपाल कृष्णऩ (Neel Gopalakrishnan) ने कहा कि ज्यादातर रेटिंग्स के मामले में हमारा मानना है कि कंपनियों की इनकम 12 से 18 महीने में ठीक हो जाएगी। अगर आर्थिक सुस्ती लंबे समय तक रहती है तो कंपनियों की रेटिंग्स को और नीचे जाने का जोखिम बना रहेगा। 


गोपालकृष्णन ने आगे कहा कि नेगेटिव आउटलुक या क्रेडिटवॉच आउटलुक वाली 7 कंपनियों में से 2 कंपनियों की रेटिंग्स स्पेकुलेटिव ग्रेड में है। लिहाजा इन कंपनियों की आमदनी को लेकर अधिक उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है। ऐसे में इनकी रेटिंग्स में और अधिक जोखिम बढ़ जाता है।


रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत में कोर्पोरेट्स खास तौर से स्पेकुलेट वाली कंपनियां बेहतर स्थिति में नहीं है। इसकी वजह ये है कि इन कंपनियों का पूंजीगत व्यय (capital expenditure) में कर्ज है। इसके अलावा इन कंपनियों द्वारा पिछले 2-3 साल में अधिग्रहण (acquisitio0n किए गए हैं। ऐसे में कंपनियों की रेटिंग पहले से नीचे आती हुई दिख रही है। सिंगल B रेटिंग वाली कंपनियों की तादात 2019 के अंत तक बढ़कर 33 फीसदी हो गई जो कि साल 2016 में 13 फीसदी थी। 



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