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Electric Two-Wheeler पॉलिसी का विरोध, 70,000 करोड़ के निवेश पर संकट

प्रकाशित Sat, 15, 2019 पर 17:06  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पॉलिसी के प्रस्ताव का विरोध जोर पकड़ने लगा है। प्रस्ताव के मुताबिक 2025 से देश में सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स ही बिकेंगे। मगर इस प्रस्ताव ने ऑटो सेक्टर में निवेश को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कंपनियों ने फिलहाल के लिए निवेश रोकने का फैसला किया है और भविष्य के निवश पर गंभीरता से विचार कर रही हैं। हैरानी की बात ये है कि खुद सरकारी एजेंसियां भी इसके लिए तैयार नहीं दिख रही हैं।


BS-6 के लिए करीब 70,000 करोड़ का निवेश कर चुकी ऑटो कंपनियों के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। उनके सामने चुनौती ये है अब वे इलक्ट्रिक व्हीकल के निवेश के लिए पैसे कहां से लाएं। सरकार के आदेश के बाद BS-6 के लिए नए प्लांट्स तो लग गए लेकिन उनके विस्तार की योजनाओं ब्रेक लग गया। हालत ये है कि करीब 5-6 हजार करोड़ की निवेश योजनाओं पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक हीरो मोटो अपने आंध्रप्रदेश प्लांट के 1500 करोड़ के निवेश पर फिर से विचार कर रही है। होंडा का कहना है कि किसी स्पष्ट नीति आने तक भारत में और निवेश पर फिर से सोचना होगा। TVS और बजाज भी अपनी मौजूदा प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाने के पक्ष मे नहीं हैं।


ऑटो कंपनियां से ज्यादा परेशान कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर हैं क्योंकि उन्हें तैयारी सालों पहले से करनी पड़ती है। अब इस प्रस्ताव से इंजन बनाने का कारोबार लगभग पूरी तरह से ठप हो जाएगा। उनके मुताबिक जब तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों की डिमांड नहीं बढ़ेगी, उसके लिए वो निवेश कैसे कर सकते हैं।


खुद सरकारी एजेंसियां इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए तैयार नहीं दिख रही हैं। चार्जिंग स्टेशन लगाने को लेकर हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने मौजूदा हालात को कारोबारी लिहाज़ से सही नहीं माना। उन्हें इस बात की भी जानकारी नहीं है कितने इलेक्ट्रिक व्हीकल सड़कों पर चल रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में पर्याप्त निवेश नहीं हो रहा है और मगर कंपनियों से इसके प्रोडक्शन को अनिवार्य बनाने को कहा जा रहा है। निश्चित रूप से ये कोशिश में ऑटो इंडस्ट्री में मौजूदा निवेश को भी प्रभावित कर रहा है।