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आवाज आंत्रप्रेन्योरः इको फ्रेंडली क्लॉथ डायपर ब्रांड, क्या हैं Superbottoms स्ट्रैटेजी

क्या आप जानते है एक डिस्पोजेबल डायपर को इस धरती से नष्ट होने में कितना समय लगता?
अपडेटेड Aug 12, 2019 पर 08:33  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

New age business का झुकाव आजकल Eco Frindly products बनाने पर है। टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के जोर पर कई नए बिजनेस पनप रहे है, इस दौर में एक मां ने बच्चे की सुरक्षा और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए आंत्रप्रेन्योर बनने का रास्ता चुना वो भी ट्रेडिशनल तरीके को मॉर्डन टच देते हुए। मुंबई के pallavi utagi ने डायपर्स के प्रदूषण को रोकने के लिए लाई है डिजाइनर अंदाज में ट्रेडिशन क्लॉथ नैपी वो भी लंबे समय तक ड्राय रहने के वादे के साथ।


क्या आप जानते है एक डिस्पोजेबल डायपर को इस धरती से नष्ट होने में कितना समय लगता? 500 साल ये समय इतना ज्यादा है की डायपर से बढ़ते प्रदूषण का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब नजर डालते है भारत में इस्तेमाल होने वाले डायपर के आंकडों पर। यहां हर साल 3 cr बच्चे पैदा होते, जिसमें से  50-60 लाख डायपर इस्तेमाल करते है , अगर एक बच्चे के लिए दिन में 5 डायपर यूज हो रहे हो,तो वो अपने डायपर इस्तेमाल करने के कुल 2-2.5 सालों में तकरीबन 4500 डायपर इस्तेमाल करता है। यानी 60 लाख बच्चेों ने इस्तेमाल किए 27,00,00,00,000 डायपर्स लैंडफिल में जमा होते जा रहे है। डायपर्स का ये सच चकरा देने वाला है।


जहां एक तरफ प्रदूषण बढ़ रहा है डिस्पोजेबल डायपर्स बच्चों के लिए सेफ भी नहीं है। अपने नवजात बच्चे को डायपर रैश से रोते बिलगते देखकर मुंबई की पल्लवी उतगी ने ट्रेडिशनल क्लॉथ नैपी इस्तेमाल करना शुरू किया। और इससे में पल्लवी को बिजनेस आइडिया दिखा। और पल्लवी ने eco-friendly, reusable cloth diaper ब्रांड Super bottom बनाया जो baby dry रखने की गारंटी देता है। खासी रिसर्च के बाद पल्लवी ने इस प्रोडक्ट को बाजार में उतारा।


Super bottom भले ही क्लॉथ डायपर हो लेकिन दिखने में ये काफी आकर्षक बनाया है। पल्लवी और उनकी टिम ने डायपर का लुक, साइज, मटिरीयल, उसका फिल इस सब पर काफी मेहनत ली है। ऑर्गेनिक कॉटन से बने ये डायपर्स बच्चों की त्वाचा के लिए भी सुरक्षित है। इसे बनाते वक्त लंबे समय तक ड्राय रहने के लिए खास तरह से डिजाइन किया है।


Super bottom डायपर को functional appeal की तरह बनाया है। ग्राहकों के सजेशनंस और फीडबैक के आधार पर कंपनी डायपर्स में बदलाव लाते रही है। सिजन और ओकेजन के हिसाब से डायपर के नए नए प्रिंट्स और प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर लगातार काम जारी रहता है, जैसे डायपर के साथ कंपनी ने बेबी प्रोडक्टस की रेंज बाजार में लाई है। पल्लवी इस सफर और बिजनेस ग्रोथ का श्रेय अपनी टीम को देती है।


सुपर बॉटम ने रिटेलिंग की शुरुआत ऑनलाइन से की कंपनी खुद की वेब साइट और Amezon, flipkart जैसे E comm मार्केटप्लेस से की। कपड़े के नैपी की जागरुकता बढ़ाने के लिए कंपनी ने होम मेकर्स मदर्स का नेटवर्क बनाकर सेल्स का ऑफलाइन चैनल शुरू किया है।


कंपनी की पहुंच दूर दराज पहुंचने के लिए और मदर्स नेटवर्क मित्र से काफी बूस्ट मिला, इसे मिलते रिस्पांसंस को देखते कंपनी अपना फोकस मित्र नेटवर्क को बढ़ा रही है।


 पहले ही साल 30 लाख के टर्नओवर से पल्लवी का आत्मविश्वास बढ़ा दिया था। तब से अब तक सालाना 5 गुना से कारोबार में बढ़त हो रही है। आज भी हर महिने 8-9% growth दर्ज हो रही है। कंपनी फिलहाल अपनी पूरी नजरे भारत के बाजार पर टिकाए हुए है। आने वाले 2 सालों में 25 करोड़ की कंपनी बना कर फिर इंटरनेशनल मार्केट में कदम रखने का प्लान पल्लवी बना रही है।


भारत में अब तक बच्चों के प्रोडक्ट्स के लिए कोई रेग्युलेटर नही है। लेकिन बच्चों के मामले में पेरेंटंस कोई रिस्क लेना नही चाहते इसलिए पल्लवी के अदंर आंत्रप्रेनोर बनने से पहले मां ने सुपर बॉटम्स को US के CPSIA यानि Consumer Product Safety Improvement Act के तहत certified  किया है। यानि देश भर में पकड़ जमाने के बाद कंपनी का विदेश का सफर आसान और कामयाब जरुर होगा।


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