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आवाज़ आंत्रप्रेन्योरः मोबिलिटी सेक्टर में बढ़ता स्टार्टअप SparesHub

मोबालिटी सेक्टर में बदलाव की हवा जोरों से चल रही है।
अपडेटेड May 11, 2019 पर 13:50  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मोबालिटी सेक्टर में बदलाव की हवा जोरों से चल रही है। रास्ते पर इलेक्ट्रिक वाहन भले ही इक्का दुक्का दिख रही हो लेकिन जल्द ही पेट्रोल, डिजल और सीएनजी गैस पर चलने वाली गाडियां आउटडेटड हो जाएंगी और हर तरफ दौड़ेगी इलेक्ट्रिक वाहन और इस बड़े बदलाव के साथ जितने बिजनेस के मौके उभरेंगे उतनाही पुराने बिजनेस को खामियाजा भुगतना होगा। लेकिन इन सभी के बीच के ऑटो स्टार्टअप अपने लिए अलग राह चुनकर लंबे समय की पारी खेलने के लिए तैयार हो रहा है। तापस गुप्ता और अरिजीत चक्रवर्ती ने मिलकर अपने ऑटो पैशन को पुरा कर रहे है SparesHub के जरिए जो है ऑटोमोबाइल एप का मार्केटप्लेस।


ऑटोमोबाइल पार्ट्स की किल्लत, समय पर उपलब्धता का अभाव, पार्ट्स का कालाबाजार, बढ़ाई हुई कीमतें ये कुछ ऐसी समस्याही थी जिससे ग्राहक झुंजते आए है। इन सभी प्रॉब्लेम्स को टेक्नोलॉजी से सुलझाने की कोशिश कर रहा है SparesHub। कंपनी सीधे ग्राहकों से डील नही करती बल्की B2B के के जरिए सर्विस सेंटर्स को पार्ट्स मुहैया करती है।


फाउंडर्स ने 2014 में SparesHub की शुरूआत स्पेयर पार्ट्स ऑनलाइन बेचने से की। देशभर से ऑर्डर्स आने लगे और लेकिन ऑनलाइन से ज्यादा ऑफलाइन में ग्रोथ पोटेंशियल को देखते हुए कंपनी ने अपना रुख सर्विस सेंटर की तरफ किया।


SparesHub के प्लेटफॉर्म पर 300 से ज्यादा स्पेयर पार्ट्स आपूर्तिकर्ता लिस्टेट है, जिनमें कई विदेशी सप्लाइर्स भी है। कंपनी अपने वेयर हाउस में पार्ट्स की इनवेंटरी स्टॉक करके ऑर्डर के हिसाब से ग्राहकों को सप्लाई करती है। डेटा एनालिटिक्स की मदद से ने ऑटो पार्ट्स सप्लाई का इक्वेशन सुलझाया जाता है।


फिलहाल कंपनी का ऑफलाइन बिजनेस मुंबई और पुणे के मार्केट में फैला है, अगले साल तक 2- 3 नए शहरों में और तीन सालों में टॉप 10 शहरों में कदम रखने की कंपनी का इरादा है। स्पेयर पार्ट्स स्टॉक करने के लिए वेयर हाउस और ऑर्डर के बाद 1 -देड घंटे में डिलीवरी के लिए लॉजिस्टीक सेट अप हर नए शहर में लगाना होता है। इसके लिए फंड्स की जरुरत पड़ती है। 2017 में एंथिल स्केल वेंचर्स, एस्वे टेक्नोलॉजीज, चेन्नई एंजेल्स से 2 करोड़ का पूर्व सीरीज A फंड जुटाने के बाद कंपनी ने इस साल इंडियन एंजल नेटवर्क से 3.5 करोड़ का फंड जुटाया है।


देशभर के ऑनलाइन मार्केट और ऑफलाइन में सिर्फ दो शहरों में परिचालन होने के बाद कंपनी का सालाना टर्नओवर 4 करोड़ है  जिसमें तगडे विस्तार के बाद मल्टी डिजीट में ले जाने पर कंपनी काम कर रही है। भारत के तर्ज पर बने साउथ इस्ट एशिया के मार्केट में कदम रखने का कंपनी का लक्ष्य है।