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KV Kamath Exclusive: इकोनॉमी में रिकवरी और चीन से निपटने का क्या है कामत फॉर्मूला

NDB की चुनौतियों पर कामत ने कहा कि बैंक सभी सदस्यों के हितों का ध्यान रखता है और बैंक आगे भी ऐसा करता रहेगा
अपडेटेड Jul 08, 2020 पर 11:14  |  स्रोत : Moneycontrol.com

दिग्गज बैंकर और एशियन डेवलपमेंट बैंक के पूर्व प्रमुख के बी कामत के साथ Network 18 के ग्रुप एडिटर राहुल जोशी ने इकोनॉमी रिकवरी,  कोरोना संकट और चीन से निपटने की रणनीति जैसे मुद्दों पर खास चर्चा की। जिसमें उन्होंने अपने न्यू डेवलपमेंट बैंक के कार्यकाल की भी चर्चा की। बता दें कि  KV Kamath NDB के पहले प्रेसिडेंट थे।


NDB ने कितना कर्ज दिया? इस सवाल पर उनका कहना था कि 5 साल में NDB ने सभी 5 सदस्यों को कर्ज दिया है। 18 अरब का लोन बुक अप्रूवल किया है। अब तक NDB ने करीब 4 अरब के कर्ज बांटे है। अगले 2 साल में सभी Disbursments होंगे। NDB की लोन ग्रोथ शानदार रही है।


NDB की चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बैंक सभी सदस्यों के हितों का ध्यान रखता है और आगे भी सभी सदस्यों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। बैंक और सदस्य जोड़ने की कोशिश में है। उन्होंने कहा NDB का भविष्य उज्जवल है।


मोदी सरकार के  6 साल कैसे रहे? इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी के झटके का असर भारत पर भी पड़ा है। सरकार के काम की रफ्तार भरोसा जगाती है। देश के जाने माने बैंकर KV Kamath को इकोनॉमी में जोरदार रिकवरी की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि 5 डॉलर टिलियन इकोनॉमी का सपना सच लगता है।


कोरोना के बाद की तस्वीर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की ग्रोथ के अनुमान से सहमत नहीं हूं। उन्होंने कहा कि कोरोना की स्थिति का आकलन मुश्किल है। भारत की इकोनॉमिक रिकवरी अनुमान से बेहतर होगी। सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। एग्री सेक्टर में काफी रोजगार मिलते हैं। एग्रीकल्चर सेक्टर में तेज रिकवरी दिखी है। उन्होंने आगे कहा कि रूरल इंडिया पर कोरोना का असर कम दिखा है। सरकार ने डिजिटल इकोनॉमी की तैयारी पहले ही की थी। डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा देने का फायदा दिखा है। सरकार ने गांवों को इंटरनेट से जोड़ा  है। इस बार पिछले सीजन से 90% ज्यादा बुआई रही है।  


टॉप इंडियन कंपनियों पर कर्ज का बोझ नहीं है। दिग्गज कंपनियां तेजी से रिकवर करेंगी। दिग्गज कंपनियों की बैलेंसशीट में स्ट्रेस नहीं है। उन्होंने कहा कि नॉलेज इंडिया का बिजनेस Revolutionery है। ऑफिस के बाहर से भी शानदार काम हो रहा है। इस मुश्किल दौर में ई-कॉमर्स इंडस्ट्री इकोनॉमी की बैकबोन रही है।


ऐसे में कोरोना से देश कैसे उबरेगा इसपर उन्होंने कहा कि भले कोरोना मामलों में इंडिया दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंचा है लेकिन इंडस्ट्री चाहती है कि बिजनेस सामान्य रूप से चले। सरकार ने जो कदम उठाए वो सही दिशा में है। सरकारें रिकवरी के तरीकों पर काम कर रही हैं। मौजूदा चुनौतियों में इकोनॉमी को चलाने पर काम हो रहा है। राज्यों को एक-दूसरे से सीख लेनी चाहिए।


सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार ने मजदूरों को रोजगार, भोजन दिया है। साथ ही MEs को सहारा देने के लिए राहत पैकेज दिया है। हालांकि बावजूद इसके सरकार को कुछ सेक्टर्स की दिक्कतों पर ध्यान देना होगा क्योंकि मौजूदा समय में कंस्ट्रक्शन, अर्बन रियल एस्टेट, इंफ्रा में कुछ दिक्कते हैं।


केवी कामत ने आगे कहा कि इंडस्ट्री के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग पटरी पर लौट रही है । ज्यादातर मैन्युफैक्चरिंग 80-90% पर लौट चुकी है। मैन्युफैक्चरिंग से सप्लाई चेन का काम शुरू हुआ है। वहीं पावर जेनरेशन 90-95% तक पहुंचा है। रेलवे के फ्रेट मूवमेंट में भी सुधार आया है। स्थिति में अनुमान से बेहतर सुधार दिख रहा है। इधर 2-व्हीलर, ट्रैक्टर बिक्री में बढ़त आने लगी है। स्थिति उतनी खराब नहीं जितना अनुमान लगाया जा रहा था
सरकार ने जो कदम उठाए उसकी तारीफ करनी चाहिए।


बैंकिंग सेक्टर की चुनौतियां पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना से पहले से ही बैंकिंग सेक्टर दिक्कत में था। सरकार ने बैंकों में बड़ी मात्रा में पूंजी डाली है। सरकार की मदद से बैंकिंग सेक्टर उबर रहा था लेकिन कोरोना के बाद बैंकों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण होगी। बैंक तभी टिकेंगे जब वे ग्रोथ करेंगे। बिना ग्रोथ के NPA नहीं संभल पाएंगे। बैंकों की ग्रोथ बनाए रखने पर ध्यान देना होगा। कम ब्याज दरें बैंकों के Survival के लिए जरूरी है। ब्याज दर कम रहेगी तो बैंकों के NPA भी कम होंगे। पूंजी के साथ ब्याज दरें कम रखना जरूरीहै। रेगुलेटर को ब्याज दरें कम बनाए रखनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर ब्याज दरें और घटानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि Moratorium के कदम का स्वागत है। जरूरत देखकर Moratorium बढ़ाएं तो अच्छा होगा। बैंकों के लिए सस्ती दरें, One time moratorium, ग्रोथ जरूरी है।


चीन पर आपका नजरिया क्या है? इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि चीन के शहरों में इकोनॉमिक ग्रोथ दिखती है। चीन के साथ विवाद पर भारत ने सही कदम उठाए है। भारत सरकार ने जो कदम उठाए वो देश हित में है। भरोसा है कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी।


चीन से इंपोर्ट घटाने के लिए आत्मनिर्भर बनने का दबाव ? इस पर  बात करते हुए उन्होंने कहा कि स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भर बनना दो अलग बातें हैं। स्वदेशीकरण पर कॉस्ट, क्वॉलिटी के साथ जोर होना चाहिए। आत्मनिर्भर होना स्वदेशीकरण से बड़ा सिद्धांत है।


क्या हम चीन से अलग होने की स्थिति में हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि चीन से पूरी तरह अलग होना तुरंत संभव नहीं है। Decouple होने के असर को भी देखना होगा। मैन्युफैक्चरिंग के लिए चीन का विकल्प हो सकता है इंडिया? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग के लिए Ease of doing business जरूरी है।


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