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Exclusive: CCI ने शुरू की Zomato-Uber Eats डील की जांच

CCI जांच कर रहा है कि क्या जोमैटो द्वारा किया जा रहा उबर इट्स का अधिग्रहण प्रतिस्पर्धा नियमों के खिलाफ है
अपडेटेड May 25, 2020 पर 12:43  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कॉम्पिटीशन कमिशन ऑफ इंडिया  (CCI) ऑनलाइन फूड कंपनी जोमैटो द्वारा उबर ईट्स की एक ईकाई के अधिग्रहण की जांच कर रही है। इस जांच का इस तरह के दूसरे सौदों पर भी असर देखने को मिल सकता है।


इस मामले से जुड़े दो लोगों ने गोपनीयता बनाए रखने की शर्त पर मनीकंट्रोल को बताया कि भारत का कम्पिटीशन रेग्यूलेटर सीसीआई इस सौदे के 2 खास पहलुओं की जांच कर रहा है। इसमें से पहला यह है कि क्या यह सौदा भारत के प्रतिस्पर्धा कानूनों के खिलाफ है और इससे उपभोक्ताओं के हितों को नुकसान पहुंचेगा। जांच का दूसरा पहलू यह है कि क्या दोनों संबद्ध पक्षों द्वारा इस सौदे के बारे  में पूर्व सूचना दी जानी चाहिए थी।


सीसीआई द्वारा की जा रही है यह जांच अपने में काफी महत्तवपूर्ण है क्योंकि पार्लियामेंट में पेश किए जाने वाले प्रस्तावित कम्पिटीशन (Amendment) बिल में जोमैटोऔर उबर इट्स इंडिया के बीच हुए करार जैसे दूसरे करारों की समीक्षा की बात की गई है।


जोमैटो के प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की है कि इस करार पर सीसीआई ने जोमैटो से संपर्क किया है और इस करार से जुड़ी कुछ बेसिक जानकारी और सफाई मांगी है।


कंपनी ने आगे कहा है कि उसका मानना है कि सीसीई की यह जांच किसी भी मर्जर और अधिग्रहण करार को लेकर भारत में होने वाली दूसरी औपचारिक जांचों की तरह ही है। कंपनी को इससे पहले भी दूसरे करारों के संबंध में सीसीआई से इसी तरह की इंफार्मेशन रिक्वेस्ट मिल चुकी है और कंपनी ने सीसीआई को नियमों के मुताबिक जरुरी सुचानाएं दी भी है।
 
जोमैटो ने जनवरी 2020 में 9.99 फीसदी स्टेक के बदले में राइड हेलिंग ऐप उबर टेक्नोलॉजिस ( ride-hailing app Uber Technologies) के इंडियन फूड डिलिवरी बिजनेस की खरीद की थी। इस सौदे का मूल्य लगभग 35 करोड़ डॉलर तय किया गया था। यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमिशन (SEC) में की गई फाइलिंग के मुताबिक इस सौदे से उबर को 15.4 करोड़ डॉलर का नेट गेन हुआ था जिसको उसने अपने खाते में अन्य आय के रुप में दिखाया था।


संभवत: भारत में कम्पिटीशन से संबंधित नियमों की व्याख्या में मतभेद के चलते जोमैटो को सीसीआई से इस सौदे पर हरी झंडी  नहीं मिली। अगर अधिग्रहित  (acquisition) की जाने वाली कंपनी की भारत में स्थित परिसंपत्तियां 350 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं है अथवा भारत में उसका टर्नओवर 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं है तो उसको सीसीआई में किसी तरह की फाइलिग की जरुरत नहीं होती है। यह कथित निम्नतम छूट सिर्फ अधिग्रहणों पर लागू होती है। इसमें मर्जर और अमलगमेशन शामिल नहीं है।


न्यूज एजेंसी रायटर्स के मुताबिक उबर ने एसईसी ( SEC) में की गई फाइलिंग में यह जानकारी दी है कि 30 सितंबर को समाप्त तिमाही में उबर ईट्स इंडिया की आय करीब 2 करोड़ डॉलर यानी 133 करोड़ रुपये रही। इस अवधि में कंपनी को 6 करोड़ डॉलर या 405 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।


ऊपर लिखित सूत्रों में से एक सूत्र ने कहा है कि उबर ईट्स इंडिया का अधिग्रहण सीधा-साधा अधिग्रहण का मामला नहीं है। इसकी एक वजह यह है कि इस सौदे में उबर द्वारा जोमेटो में हिस्सेदारी खरीदने का भी प्रावधान है। यह इस सौदे को काफी जटिल बना देता है। यह टिप्पणी करने वाला यह व्यक्ति भारत के प्रतिस्पर्धा कानूनों और सीसीआई के कार्यप्रणाली के बारे में अच्छी जानकारी रखता है।


वित्त वर्ष 2019 में जोमेटो को 1397 करोड़ रुपये की आय पर 1000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। चाइनीज कंपनी Ant Financial के कंपनी में 15 मिलियन डॉलर के निवेश करते समय जोमेटो का वैल्यूएशन 3 अरब डॉलर किया गया था।


जोमैटो को भारत में स्विगी से कठोर प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। कोरोना महामारी के चलते देशभर में लागू लॉकडाउन के चलते ऑनलाइन फूड बिजनेस को भारी चोट सहनी पड़ी है।


भारतीय प्रतिस्पर्धा कानूनों के तहत यदि सीसीआई इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि व्यक्ति या कंपनी को मर्जर के संदर्भ में सूचना देनी चाहिए थी और ऐसा नहीं किया गया तो वह संबंद्ध पक्ष पर जुर्माना लगा सकता है। यह जुर्माना संबंद्ध पक्ष के परिसंपत्तियों/टर्नओवर, इनमें से जो ज्यादा हो का 1 फीसदी हो सकता है।


प्रस्तावित कम्पिटीशन  लॉ के प्रारुप में मर्जर पर नियंत्रण के लिए अतिरिक्त क्राइटेरिया निर्धारित करने की मांग की गई है। यह प्रतिस्पर्धा कानून में होने वाला सबसे अहम बदलावों में से एक होगा। अगर सीसीआई अपनी जांच में यह पाता है कि जोमैटो उबर करार में इन नियमों का उल्लघंन हुआ है तो इन कंपनियों को मुश्किल हो सकती है।


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