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जीएसटी रिफंड अटकने से एक्सपोर्टर्स परेशान

प्रकाशित Sat, 10, 2018 पर 13:56  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जीएसटी से एक्सपोर्टर्स की दिक्कतें बढ़ गई हैं। कई महीनों से एक्सपोर्टर्स का रिफंड अटका हुआ है। इससे उनका कैश फ्लो कम हो गया है और बिजनेस पर भी खासा असर पड़ रहा है।


गारमेंट एक्सपोर्टर विश्वनाथ करीब 45 साल से एक्सपोर्ट के कारोबार में हैं। लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद विश्वनाथ रिफंड के पेपर वर्क में अटक गए हैं। इन्हें सभी शिपिंग बिल को संभालकर रिफंड क्लेम करना पड़ता है। और पूरा ध्यान रखने के बाद भी छोटी सी गलती की वजह से रिफंड रुक जाता है। ऐसे में विश्वनाथ जैसे एक्सपोर्टर्स रिफंड में गलती करने के बजाए देरी से रिफंड भरना बेहतर समझ रहे हैं।


जीएसटी रिफंड की समस्या एक्सपोर्टर्स के लिए काफी बड़ी है। अक्टूबर 2017 से जनवरी 2018 तक वित्त मंत्रालय ने सिर्फ 4,000 करोड़ रुपये का रिफंड दिया है। अभी भी एक्सपोर्टर्स का 10,000 हजार करोड़ रुपये का रिफंड अटका हुआ है। ज्यादातर रिफंड शिपिंग बिल और जीएसटी रिफंड की जानकारी मैच नहीं होने से रोके जा रहे हैं। जानकारियां मैच नहीं होने की वजह से एक्सपोर्टर्स का 70 फीसदी से ज्यादा रिफंड अटका हुआ है। हालांकि एक्सपोर्टर्स की समस्या का हल निकालने के लिए सरकार ने काम तेज कर दिया है।


जीएसटी रिफंड में पैसे अटकने से एक्सपोर्टर्स का कारोबार धीमा पड़ गया है। रिफंड के लिए बार-बार नियमों में बदलाव से भी एक्सपोर्टर्स परेशान हैं। जीएसटी रिफंड की समस्या सिर्फ एक्सपोर्टर्स तक ही सीमित नहीं है। इसका असर रोजगार पर भी पड़ रहा है। एक्सपोर्ट एक ऐसा सेक्टर है जो बड़े तादाद में रोजगार देता है। ऐसे में रोजगार पर असर पड़ना सरकार के लिए भी चिंता का विषय है।