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फेक न्यूजः चुनाव आयोग की सख्ती के बावजूद लगाम नहीं

प्रकाशित Tue, 16, 2019 पर 12:03  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

चुनावी माहौल में राजनीतिक पार्टियां को विरोधी पार्टियों के साथ साथ फेक न्यूज से बड़ी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। हालांकि चुनाव आयोग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खुद भी फेक न्यूज़ पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन ये नाकाफी साबित हो रहा है।


बीजेपी हो या कांग्रेस फेक न्यूज़ ने सबकी नाक में दम कर रखा है। ऐेसे में इससे निपटने के लिए दोनों पार्टियों ने सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक पूरी ताकत झोंक रखी है। फेक न्यूज के कुछ नमूने देखिए बीजेपी के वरिष्ठ नेता आडवाणी के नाम मुरली मनोहर जोशी की फेक चिट्ठी, पाकिस्तान के पीएम इमरान खान के साथ प्रधानमंत्री मोदी की खाना खाते हुए तस्वीर, बुरखे में फर्जी वोटिंग का एक साल पुराना वीडियो, वायनाड में राहुल की रैली में पाकिस्तानी झंडे,  पेट्रोल पंप पर चौकीदार चोर है का होर्डिंग ये तमाम फेक न्यूज हैं। मजेदार बात है कि ऐसे फेक न्यूज के सामने आते ही पार्टियां विरोधी पार्टी पर पिल पड़ती हैं। पिछले हफ्ते जब डिफेंस से रिटायर्ड अधिकारियों की चिट्ठी ख़बरों में आई तो बीजेपी ने इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।


इधर कांग्रेस के मीडिया सेल से जुड़े लोगों का कहना है कि बीजेपी फेक न्यूज़ के ज़रिए उनके पूरे घोषणा पत्र और ख़ास तौर से न्याय स्कीम को डिरेल करने की कोशिश कर रही है।


पिछले लोक सभा चुनाव 2014 में बीजेपी सोशल मीडिया की सुपरस्टार थी, लेकिन 2019 आते आते तमाम पार्टियां सोशल मीडिया पर छा चुकी हैं। 2014 में 25 करोड़ लोग इंटरनेट पर थे, अब 56 करोड़ हो चुके हैं और नेट पर राजनीतिक मुकाबले का आलम ये है कि पार्टियों की आईटी टीम को औसतन रोजाना 10-12 फेक न्यूज से लड़ना पड़ता है। और कई बार फेक न्यूज का जवाब फेक न्यूज से ही दिया जाता है।