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वित्त मंत्री ने इंडस्ट्री को दिया भरोसा, सभी सेक्टर की दिक्कतें दूर की जाएंगी

वित्त मंत्री ने राहत पैकेज पूरी तरह लागू कराने के साथ-साथ आगे भी मदद का भरोसा दिया है।
अपडेटेड Sep 09, 2019 पर 08:57  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने इंडस्ट्री को भरोसा दिया है कि सभी सेक्टर की दिक्कतों को दूर किया जाएगा। वित्त मंत्री ने राहत पैकेज पूरी तरह लागू कराने के साथ-साथ आगे भी मदद का भरोसा दिया है।


उधर देश को 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लिए सरकार एक्शन में आ गई है। इसके लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो निवेश बढ़ाने के लिए रोडमैप तैयार करेगी। इस  टास्क फोर्स का गठन DEA सेक्रेटरी की अध्यक्षता में किया गया है। नीति आयोग और निवेश सचिव भी इस टास्क फोर्स में शामिल हैं। पिछले 10 साल में 1.1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश किया गया है। अगले 5 साल में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का निवेश होगा। कमेटी अपनी पहली रिपोर्ट 31 अक्टूबर तक देगी। इस रिपोर्ट में 2019-20 के निवेश का लक्ष्य होगा। कमेटी अपनी अंतिम रिपोर्ट 31 दिसंबर तक सौंपेगी। इस रिपोर्ट में 2024-25 तक के निवेश का लक्ष्य होगा।


PM ने 15 अगस्त को इसकी घोषणा की थी। ये कमेटी इंफ्रास्टकचर प्रोजेक्ट की पहचान करेगी और इन प्रोजेक्ट्स पर आने वाली खर्च की रिपोर्ट तैयार करेगी। ये बाकी मंत्रालयों को फंड जुटाने के रास्ते तलाशने में भी मदद करेगी। पहचाने गए सभी प्रोजेक्टस की खर्च की समीक्षा की जाएगी और 100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स को ही बढ़ावा मिलेगा।


इस बीच खबरें हैं कि स्टील कंपनियों को सरकार जल्द राहत दे सकती है। सस्ते कोकिंग कोल की सप्लाई बढ़ाने और कोकिंग कोल आयात पर रोक लगाने पर फैसला हो सकता है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक स्टील कंपनियों को राहत देने के लिए सरकार कोकिंग कोल नीलामी के नियमों में बदलाव कर सकती है। कोकिंग कोल का घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला भी लिया जा सकता है। इसके साथ ही कोकिंग कोल आयात पर भी लगाम लग सकती है।


सूत्रों के मुताबिक नीति आयोग की कमिटी ने सस्ते कोकिंग कोल प्रोडक्शन में निजी कंपनियों को रियायत देने, कोकिंग कोल लिंकेज 20 साल तक देने और कोल इंडिया की पुरानी वॉशरिज का नीजिकरण करने की भी सिफारिश की है। सरकार के इस कदम से SAIL, JSW, JSPL, RINL को फायदा मिल मिल सकता है।


यही नहीं सुस्ती से जूझ रहे ऑटो कंपोनेंट, रेलवे वैगन और टेक्सटाईल सेक्टर को GST दरों में राहत मिल सकती है। वित्त मंत्रालय ऐसे कई आईटम्स की GST दरों में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। दरअसल आज से फिटमेंट कमिटी की दो दिनों की बैठक शुरू हो रही है, जिसमें कई अहम प्रस्ताव तैयार होने हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ऑटो कंपोनेंट, स्पेयर पार्ट्स पर GST कटौती संभव है। EV गाड़ियों के बैटरी पैक पर भी जीएसटी दर कम हो सकती है। ऑटो कंपोनेंट पर GST अभी 18-28 फीसदी के दायरे में है।


इसके अलावा घरेलू रेलवे वैगन कंपनियों को भी राहत देने की तैयारी है। अभी वैगन मैन्युफैक्चरिंग पर 5 फीसदी GST लगता है जिसके चलते देश में इनकी मैनुफैक्चरिंग इम्पोर्टेड वैगन के मुकाबले महंगी पड़ती है।


टेक्सटाइल रॉ मैटेरियल पर ज्यादा GST से बुनकर भी परेशान हैं। अभी फाइबर पर 18 फीसदी और यार्न पर 12 फीसदी GST लगती है। वहीं, फिनिश्ड टेक्सटाइल पर 5 फीसदी जीएसटी लगती है। इकोनॉमी की सुस्ती से निपटने के लिए GST के मौजूदा रेट स्ट्रक्चर को दुरूस्त करने की तैयारी है। वित्त मंत्रालय की फिटमेंट कमिटी की इस बैठक में सैनिटरी नैपकिन और हेल्थ सेक्टर पर भी दरों की समीक्षा की जाएगी। फिटमेंट कमिटी के प्रस्तावों पर GST काउंसिल में फैसला होगा।


घटते एक्सपोर्ट औऱ बढ़ती बेरोजगारी को थामने के लिए अब एक्सपोर्ट सेक्टर पर सरकार का फोकस है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए पॉलिश्ड डायमंड और कलर्ड जेम्स स्टोन पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर विचार कर रही है। जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर को महंगे स्टोन इंपोर्ट से छुटकारा मुमकिन है। सूत्रों के मुताबिक पॉलिश्ड डायमंड पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर 2.5 फीसदी करने और कलर्ड जेम्स स्टोन पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर 2.5 फीसदी करने पर विचार किया जा रहा है। बता दें कि दोनों पर इंपोर्ट ड्यूटी 2.5 फीसदी से बढ़ाकर 7.5 फीसदी किया गया था।


सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सिल्वर और प्लैटिनम को भी IGST से छूट देने पर विचार किया जा सकता है। जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर के कंसाइनमेंट के क्लियरेंस के लिए आसान SOP (Standard Operating Procedure) जारी किया जा सकता है। एसईजेड से फ्री ट्रेड एरिया में सामान लाने पर ड्यूटी में 40 से 50 फीसदी की छूट दी जा सकती है। इसके साथ ही स्पेशल इकोनॉमिक जोन के लिए सनसेट क्लॉज तत्काल बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है और SEZ के लिए मिनिमम एरिया लिमिट की समीक्षा की जा सकती है।


सूत्रों के मुताबिक सरकार का स्टील, एग्री, फार्मा एक्सपोर्ट पर फोकस होगा। एक्पसोर्ट को बढ़ावा देने के लिए ईसीजीसी यानी एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन का कवरेज 60 फीसदी से बढ़ाकर 80 से 90 फीसदी किया जा सकता है।



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