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होम बायर्स को राहत, SC ने बैंकों और घर खरीदार का दर्जा बराबर माना

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक घर खरीदारों को फाइनेंशियल क्रेडिटर्स का दर्जा मिलेगा
अपडेटेड Aug 10, 2019 पर 16:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

होमबायर्स को बड़ी राहत देते हुए 9 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) में संशोधन को बरकरार रखा। इसमें होमबायर्स को भी फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के बराबर का दर्जा दिया गया है। यानी घर खरीदने वालों की अहमियत भी बिल्डर को लोन देने वाले बैंकों के बराबर होगी।


इस संशोधन के खिलाफ में करीब 200 रियल एस्टेट कंपनियों ने याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि IBC में किया गया संशोधन अवैध और असंवैधानिक है। इन याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस आरएफ नरिमन ने कहा कि इस संशोधन से होम बायर्स को एक और प्लेटफॉर्म मिला है जहां वो रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ अपनी मुश्किलें रख सकते हैं.


बेंच ने कहा कि RERA को IBC संशोधनों के हिसाब से काम करने के लिए तैयार रहना चाहिए। कोर्ट ने साफ कर दिया कि अगर RERA और IBC के बीच कोई मतभेद होता है तो RERA को किसी कानून से छूट नहीं दी जाएगी।


बेंच ने कहा कि सिर्फ सही होमबायर्स ही बिल्डर्स के खिलाफ इनसॉल्वेंसी की मांग कर सकता है। साथ ही केंद्र सरकार को सुधार के उपायों पर एक हलफनामा दायर करने को कहा है। कुछ होमबायर्स की पैरवी कर रही एश्वर्या सिन्हा ने कहा कि IBC के संशोधन को बरकरार रखना एक लैंडमार्क फैसला है।


सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा है कि वह नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल एंड एपील ट्राइब्यूनल की खाली वैकेंसी भरे ताकि काम सही ढंग से हो सके।



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