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Lockdown के चलते 14% हो सकता है वित्तीय घाटा: पूर्व RBI गर्वनर

एक वेबीनार में बोलते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गर्वनर डॉक्टर सुब्बाराव ने कहा कि केंद्र और राज्यों का वित्तीय घाटा चालू वित्त वर्ष में 13-14 प्रतिशत हो जाएगा।
अपडेटेड May 12, 2020 पर 08:48  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पूर्व आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि 26 मार्च को केंद्र सरकार द्वारा घोषित वित्तीय सहायता लॉकडाउन से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। एक वेबीनार में बोलते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गर्वनर डॉक्टर सुब्बाराव ने कहा कि केंद्र और राज्यों का वित्तीय घाटा चालू वित्त वर्ष में 13-14 प्रतिशत हो जाएगा।


डॉ सुब्बाराव ने कहा कि सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद में 0.8 प्रतिशत की वित्तीय सहायता की घोषणा की है। लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है। 26 मार्च की स्थिति और आज की स्थिति में बहुत अंतर है। आज की स्थिति को देखते हुए सरकार को अपना खर्च बढ़ाना होगा। सरकार को कुल तीन चीजों पर सबसे ज्यादा खर्च करना होगा ऐसा उन्होंने कहा।


उन्होंने कहा कि नागरिकों को जीवनावश्यक वस्तुओं उपलब्ध कराने के लिए पहले खर्च करना होगा। इसके बाद हर परिवार अच्छे से जी सके उसके लिए सिस्टम की लागत बढ़ानी होगी। इसी तरह सरकार को खर्च बढ़ाने के लिए उधार लेना होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को ऐसा करने में खुद पर कोई सीमा नहीं लादनी चाहिए।


महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक उन्होंने कहा कि दुनिया को कोरोना के साथ और समय तक रहना होगा। इस दौरान कच्चे तेल की कीमतें गिरने और कृषि में रिकॉर्ड पैदावार करने से अर्थव्यवस्था को राहत मिली है।


उन्होंने आगे  कहा कि देश में चिकित्सा के बुनियादी ढांचे की खराब गुणवत्ता और उच्च जनसंख्या घनत्व के कारण समाज में ये असमंजस था कि प्राथमिक रूप से जीवन या जीवनयापन के साधनों में से किसका चयन  किया जाये।


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