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एक क्लिक पर जानें देश भर में कहीं भी प्रॉपर्टी

प्रकाशित Fri, 17, 2019 पर 15:35  |  स्रोत : Moneycontrol.com

मोदी सरकार ने रियल एस्टेट रेग्युलेटरी एक्ट को बनाकर डेवलेपर (विकासक) और बायर्स (खरीदार) के बीच ट्रांसपैरेंसी (पारदर्शी) लाने के लिए पुल बना दिया है। शुरुआती दौर में बिल्डरों ने रेरा में अपने प्रोजेक्ट का रजिस्टेशन बहुत देरी से करा रहे थे। साथ ही राज्य सरकारों में भी रेरा को हर प्रदेश लागू होने में देरी हुई। अब रेरा का कायापलट होने वाला है। यानी रेरा की एक एक ऐसी सिंगल वेबसाइट रहेगी। जिसमें देश भर के सभी भवन निर्माताओं को अपने प्रोजेक्ट रजिस्टर करना होगा।


 दरअसल केंद्र सरकार रेरा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए कदम उठा रही है। सरकार का मकसद है कि सभी राज्यों में मौजूद रेरा नियामक को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाया जाए। हालांकि इसका फैसला 27 मई के बाद ही लिया जाएगा। इस नई व्यव्था से सभी रेरा रेग्युलेटर को एक दूसरे से लिंक कर दिया जाएगा। इससे खरीदारों को आसानी होगी। साथ ही बिल्डरों के चल रहे प्रोजेक्ट्स की जानकारी एक वेबसइट पर मिल जाएगी।
 रेरा के एक ही प्लेटफॉर्म में आने से केंद्र सरकार की नजर बनी रहेगी। ऐसे में इसमें आने वाली कानूनी अड़चनों को कम किया जा सकता है। साथ ही शिकायत का निपटारा भी जल्द होने की उम्मीद जताई जा रही है। 


 देश के 29 राज्यों में रेरा लागू है। जहां 20 राज्यों में स्वतंत्र रूप से रेरा है। 9 राज्यों में रेरा की जिम्मेदारी उस विभाग के प्रमुख सचिव को दी गई है। पिछले दिनों ही दिल्ली में देश भर के रेरा रेग्युलेटरों ने एक दूसरे से मुलाकात की थी। इसको और अधिक मजबूत करने और इस पर आ रही अड़चनों के बारे में चर्चा की गई थी।
आपको बता दें कि रेरा रेग्युलेटरी के गठन के लिए 27 मई को दिल्ली में एक कान्फ्रेन्स आयोजित की गई है। जिसमें केंद्रीय नगरीय विकास प्रमुख डी एस मिश्रा के मौजूद रहने की संभावना जताई जा रही है। अब इस पर विचार किया जा रहा है कि इसे कंपनी का रूप दिया जाए या सोसायटी या फिर ट्रस्ट का रूप दिया जाए।


कुल मिलाकर रेरा को अगर एक वेबसाइट पर लिंक कर दिया गया। तो देश भर के खरीदारों को राहत मिलेगी। साथ ही बिल्डरों के प्रोजेक्ट्स के काम काज पर भी निगरानी बनी रहेगी।