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टेंशन में विदेशी पेमेंट कंपनियां

प्रकाशित Sat, 13, 2018 पर 14:59  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

विदेशी पेमेंट कंपनियों को 15 अक्टूबर तक सारा डाटा भारत लाना होगा। इस फरमान ने विदेशी कंपनियों की नींद उड़ा रखी है। एक तो वक्त बहुत कम है, ऊपर से इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने में काफी पैसा लगेगा।


जैसे जैसे 15 अक्टूबर की तारीख करीब आ रही है वैसे वैसे विदेशी पेमेंट कंपनियों की मुसीबत बढ़ती जा रही है। आरबीआई की नई नीति के तहत 15 अक्टूबर तक उन्हें अपना डाटा सेंटर भारत में लाना होगा। अब कंपनियां कह रही हैं कि वो खुद डाटा सेंटर को भारत लाना चाहती हैं लेकिन इतनी जल्दबाजी में सब करना मुश्किल है।


डाटा भारत लाने की मजबूरी का सबसे बुरा असर Pay-Pal, Visa और Mastercard जैसी कंपनियों पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि वक्त तो कम है ही, उन्हें नई पॉलिसी की पूरी जानकारी भी नहीं है। डाटा लोकलाइजेशन लागू करने के दौरान व्यापारियों को ज्यादा सावधान रहना होगा और उपभोक्ताओं को नए सिरे से कागजात देने होंगे। लेकिन डाटा लोकलाइजेशन से देसी कंपनियां जैसे पेटीएम और फोनपे बहुत खुश हैं क्योंकि अब उन्हें विदेशी कंपनियों को टक्कर देने में थोड़ी आसानी होगी।