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बाजार के 4 महीने की तेजी ने निवेशकों को कर दिया मालामाल, वेल्थ में 31 लाख करोड़ रुपये का इजाफा

इस फिस्कल ईयर में अप्रैल-जुलाई के दौरान 30 शेयरों वाले BSE सेंसेक्स में 3,077.69 अंक यानी 6.21 फीसदी का उछाल आया है
अपडेटेड Aug 02, 2021 पर 10:05  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Stock Market:  बाजार में बुलिश सेंटीमेंट का असर देखने को मिल रहा है। मौजूदा फिस्कल ईयर के के शुरुआती 4 महीनों में ही निवेशकों के वेल्थ में 31 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।


30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स इस फिस्कल ईयर के अप्रैल – जुलाई अवधि में 3,077.69 अंक यानी 6.21 फीसदी का उछाल आया है।
 
मार्केट में जोश का हाल ये है कि 16 जुलाई 2021 को सेंसेक्स 53,290.81 के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गया और 15 जुलाई को यह 53,158.85 ऑलटाइम हाई पर क्लोज हुआ।


30 जुलाई तक BSE पर लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में 31,18,934.36 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है और यह 2,35,49,748.90 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।


Equity99 के को-फाउंडर राहुल शर्मा (Rahul Sharma) का कहना है कि बाजार में आए पैसे के प्रवाह और बढ़ी हुई लिक्विडिटी से निवेशकों के बुलिस सेंटिमेंट का अहम कारण है।


शर्मा ने आगे कहा कि 2020 में आई बिकवाली के बाद बाजार ने बहुत जोरदार प्रदर्शन किया है। सेंसेक्स निफ्टी मार्च 2020 के निचले स्तर से करीब दोगुना पहुंच गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि एक बार जब रैली शुरू हुई तो वोलैटिलिटी (volatility) वोलैलटिलिटी में गिरावट देखने को मिली और बुल मार्केट ने जोरदार छलांग लगाया।


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पूरे फिस्कल ईयर 2020-21 में BSE में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 90,82,057.95 करोड़ रुपये बढ़कर 2,04,30,814.54 करोड रुपये पर पहुंच गया। कोरोना वायरस महामारी से जुड़ी तमाम अनिश्चतताओं के बवाजूद पिछले फिस्कल ईयर में BSE सेंसेक्स में 20,040.66 अंक यानी 68 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।


Geojit Financial  के वी के विजय कुमार (V K Vijayakumar) का कहना है कि सबसे  पहले हमें इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि पूरी दुनिया के बाजार में तेजी बनी हुई है। हालांकि इजिप्ट (मिश्र) और ईरान इसके अपवाद है। इन दो बाजारों को छोड़ दें तो सभी अहम बाजार अपट्रेंड में नजर आ रहे हैं।


उन्होंने आगे कहा कि बाजार में दम भरने वाले कारणों पर नजर डालें तो पूरी दुनिया के तमाम अहम देशों के केंद्रीय बैंकों ने अपने-अपने देशों में लिक्विडी बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। खासतौर पर यूएस फेड (US Fed) ने अमेरिका में ब्याज दरों को ऐतिहासिक निचले स्तरों पर बनाए रखा है। अर्थव्यवस्था में आए मुद्रा के प्रवाह ने इक्विटी बाजार का रूख किया है। जिससे इक्विटी में तेजी दिख रही है।


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इसके साथ ही बाजार के जानकारों का मानना है कि कोरोना वैक्सीनेशन के आगे  बढ़ने के साथ ही बाजार को तेजी का सहारा मिल रहा है। विजय कुमार से जब यह पूछा गया कि क्या यह तजी जारी रहेगी तो उन्होंने कहा कि इस समय बाजार में सबसे बड़ी चिंता वैल्यूएशन काफी महंगा हो जाने की वजह से है। ऐसी स्थिति में कभी भी करेक्शन आने की सभावना बनी रहती है।


इसके अलावा ग्लोबल फैक्टर भी बाजार पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं। अगर ऐसा कुछ नहीं होता है तो ग्लोबल लिक्विडिटी बाजार में मजबूती बनाए रखेगी और इसमें आगे इजाफा देखने को मिल सकता है। 


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