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गार्डन लीव पॉलिसी: नौकरी तो छोड़ी, कंपनी ने नहीं छोड़ा!

प्रकाशित Fri, 08, 2018 पर 17:14  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बढ़ते कॉम्पिटिशन के बीच अच्छे टैलेंट को बनाए रखना कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती है। दूसरी कंपनी किसी कर्मचारी को तोड़ने की कोशिश न करे इसीलिए कई कंपनियों ने अब गार्डन लीव पॉलिसी शुरु कर दी है। गार्डन लीव पॉलिसी यानि कंपनी छोड़ने के बाद कोई कर्मचारी एक तय वक्त तक दूसरी कंपनी में काम नहीं कर सकता है। पहले ये पॉलिसी सिर्फ बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियों में ही प्रचलित थी लेकिन अब कई कंपनियां ऐसा करने लगी हैं। इसके अलावा सिर्फ ऊंचे पदों पर काम करने वालों के लिए कंपनियां इसका इस्तेमाल करती थी लेकिन अब ये मिडिल लेवल कर्मचारियों के लिए भी इस्तेमाल हो रही है। जानकार मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में कई और कंपनियां भी ऐसा करेंगी।


हालांकि जानकारों का कहना है की गार्डन लीव पॉलिसी कानूनी तौर पर सही नहीं है। इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट 1872 के हिसाब से इसे कानूनी मान्यता नहीं है। कंपनी अपने कर्मचारी को नोटिस पीरियड पूरा करने को तो कह सकती है लेकिन एक बार कर्मचारी ने कंपनी छोड़ दी उसके बाद कर्मचारी को कुछ भी करने से रोका नहीं जा सकता।


टैंलेंट को बनाए रखना कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती जरूर है लेकिन उसके लिए गार्डन लीव पॉलिसी जैसे तरीके कर्मचारियों के काम पर भी असर डाल सकते हैं। वैसे भी इस तरह की पॉलिसी में कमर्चारियों को बांधना गैरकानूनी है और वो इसे कोर्ट में चुनौती भी दे सकते हैं।