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सवर्ण आरक्षण बिल संसद में पेश

प्रकाशित Tue, 08, 2019 पर 16:26  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकार ने जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए बिल लोकसभा में पेश कर दिया है। अगर ये बिल आज लोकसभा से पास हो जाता है तो कल इस पर राज्यसभा में बहस होगी। इस बिल को पारित करने के लिए राज्य सभा का शीतकालीन सत्र 1 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। सामान्य वर्ग के लोगों को आरक्षण देने के लिए संविधान में बदलाव करना होगा। कल ही कैबिनेट ने इस बिल को मंजूरी दी थी। चुनाव से पहले इसे मोदी सरकार का एक बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है। ज्यादातर विपक्षी पार्टियों ने इस बिल समर्थन किया है लेकिन साथ ही इसे चुनावी स्टंट भी कहा है। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने भी सरकार के इस कदम का समर्थन किया है। लेकिन समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने कहा है कि अब पिछड़ों का आरक्षण आबादी के अनुपात में दिया जाए।


सवर्ण आरक्षण पर सरकार के इस कदम पर सपा नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि जिस आधार पर यह फैसला लिया गया है अब हमारी मांग है कि ओबीसी वर्ग को भी आबादी के तर्ज पर 54 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए।


गौरतलब है कि इस बार संसद सत्र में सरकार ने 16 से ज्यादा बिल पेश किए। उम्मीद की जा रही है कि आज ही राज्यसभा में ट्रिपल तलाक और ट्रांसजेंडर लोगों से संबंधित बिल रखे जाएंगे। इसके अलावा लोकसभा में डीएनए टेक्नोलॉजी से संबंधित बिल रखा गया। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में सिटिजनशिप संशोधन बिल रखा जिसपर जोरदार हंगामा देखने को मिला और इसी हंगामे के बीच कांग्रेस ने लोकसभा से वॉकआउट भी किया। तृणमूल कांग्रेस ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि इससे उत्तर पूर्व में अशांति फैलेगी। तृणमूल कांग्रेस ने ससंद के बाहर भी सिटीजनशिप बिल पर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। लेकिन गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने साफ किया कि ये बिल किसी एक राज्य के लिए नहीं है।