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सरकार के फ्री वैक्सीनेशन ने प्राइवेट हॉस्पिटल्स का किया बंटाधार, 25% टीकों का नहीं हुआ उपयोग

लोग निजी अस्पतालों में टीका लगवाने की बजाय मुफ्त में उपलब्ध सरकारी टीका लगवा रहे हैं
अपडेटेड Sep 26, 2021 पर 09:56  |  स्रोत : Moneycontrol.com

निजी अस्पतालों से भारत के कोविड -19 टीकाकरण अभियान में एक प्रमुख भूमिका निभाने की उम्मीद थी लेकिन सरकार के मुफ्त टीकाकरण अभियान ने उनकी भूमिका को बेअसर कर दिया। अब उनमें से कई को राज्य सरकारों को उपयोग नहीं किये गये टीके वापस करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अन्य अपने स्टॉक को क्लियर करने और घाटे में कटौती करने के लिए छूट या सर्विस चार्ज माफ करने की योजना चला रहे हैं।


कोलकाता स्थित मेडिका सुपरस्पेशालिटी अस्पताल के अध्यक्ष डॉ आलोक रॉय ने कहा कि कई (अस्पताल)  कोविड -19 टीकों का बड़ा स्टॉक लेकर फंस गये हैं। रॉय फिक्की स्वास्थ्य सेवा समिति (FICCI Health Services Committee) के अध्यक्ष भी हैं।


रॉय ने सरकार द्वारा निर्धारित टीके की ज्यादा कीमतों को जिम्मेदार ठहराया। रॉय ने कहा कि अपने वैक्सीन के स्टॉक को खाली करने के लिए उनका अस्पताल 20 प्रतिशत की छूट दे रहा है।


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रॉय ने आगे कहा कि लोग कोविड -19 टीकाकरण के लिए पैसा देने को तैयार नहीं हैं क्योंकि वे इसे सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर मुफ्त में प्राप्त कर रहे हैं और वे अपनी बारा का इंतजार करने को तैयार हैं।


भारत के सबसे बड़ी निजी अस्पताल ग्रुप में से एक फोर्टिस हेल्थकेयर (Fortis Healthcare) ने कहा कि बहुत कम लोग इनके टीकाकरण केंद्रों तक आ रहे हैं।


इस समूह के मुख्य ऑपरेटिंग अधिकारी अनिल विनायक ने कहा कि सरकार के माध्यम से मुफ्त टीकाकरण की उपलब्धता में इजाफा होने के साथ ही जुलाई से इनके यहां टीकाकरण में काफी कमी आई है। उन्होंने कहा कि फिर भी फोर्टिस अपने अस्पतालों में नागरिकों का टीकाकरण जारी रखेगा।


स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि भारत ने 24 सितंबर तक कोविड -19 टीकों के 84 करोड़ डोज लगाये थे। निजी क्षेत्र ने 1 मई से 22 सितंबर तक प्राइवेट अस्पतालो का इस वैक्सीनेशन में केवल 6 प्रतिशत का योगदान रहा।


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