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पैराशूट बाबूओं की एंट्री पर विपक्ष का वार

प्रकाशित Mon, 11, 2018 पर 16:08  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मोदी सरकार ने नौकरशाही में प्रवेश पाने का अब तक का सबसे बड़ा बदलाव किया है। अब बड़े अधिकारी बनने के लिए यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा पास करना जरूरी नहीं होगा। प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले सीनियर अधिकारी भी सरकार का हिस्सा बन सकते हैं। बहुप्रतीक्षित लैटरल एंट्री की औपचारिक अधिसूचना सरकार की ओर से जारी कर दी गई है। रविवार को इन पदों पर नियुक्ति के लिए डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल ऐंड ट्रेनिंग के लिए विस्तार से गाइडलाइंस के साथ अधिसूचना जारी की गई। सरकार अब इसके लिए सर्विस रूल में जरूरी बदलाव भी करेगी। मालूम हो कि पीएम नरेंद्र मोदी ब्यूरोक्रेसी में लैटरल एंट्री के शुरू से हिमायती रहे हैं।


बड़े सरकारी पदों पर प्राइवेट सेक्टर के लोगों की भर्ती का मामला राजनीतिक रंग लेने लगा है। विपक्षी पार्टियां आरोप लगा रही हैं कि मोदी सरकार ने खास विचारधारा के लोगों को जगह देने के लिए ये रास्ता चुना है। वहीं नौकरशाह सलाह दे रहे हैं कि भर्ती के दौरान सतर्क रहने की जरूरत है। आखिर इस विरोध में कितना दम है आइए देखते हैं।


मोदी सरकार ने देश में नौकरशाहों की मजबूत दीवार में निजी क्षेत्र के लिए दरवाजा खोल दिया है। सरकार ने ज्वॉइंट सेक्रेटरी स्तर के 10 पदों पर बहाली के लिए निजी क्षेत्र से भी आवेदन मंगाए हैं। विपक्ष की पार्टियां इसमें राजनीति देख रही हैं। कांग्रेस का कहना है कि ये व्यवस्था पर पूरी तरह से कब्जा करने की कोशिश है। इसके जरिये बीजेपी ऐसे लोगों को वरिष्ठ पदों पर लाना चाहती है जिन्हें बीजेपी और आरएसएस अपने तरीके से चला सकें।
 
सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि सीपीएम ने भी साफ आरोप लगाया है कि बीजेपी, आरएसएस की विचारधारा वाले लोगों को लाकर प्रशासन पर कब्जा करना चाहती है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव इसे आरक्षण विरोधी और असंवैधानिक बताया है। लेकिन सरकार दो टुक कह रही है कि बड़े प्रशासनिक पद किसी की बपौती नहीं है।


नौकरशाह फैसले का सीधे विरोध तो नहीं कर रहे हैं लेकिन भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की वकालत जरूर कर रहे हैं। इन्हें डर है कि भर्ती के दौरान भाई भतीजावाद हावी ना हो जाए। कइयों का तो ये मानना है कि कायदे से ये भर्ती प्रक्रिया यूपीएससी के जरिये होनी चहिए। वैसे ये पहली बार नहीं हो रहा है। जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं तब भी सचिव स्तर पर 4 लोगों की नियुक्ति निजी क्षेत्र से की गई थी। मोदी सरकार भी सचिव स्तर पर 2 नियुक्तियां निजी क्षेत्र से कर चुकी है।


विवाद जो भी लेकिन अगर आपकी उम्र 40 साल हो चुकी है और निजी क्षेत्र में 15 साल का अनुभव है तो आप बड़े सरकारी बाबू बन सकते हैं। दो लाख 18 हजार रुपये तक की सैलेरी मिलेगी साथ में आलीशान बंगला और बगैर लालबत्ती वाली ही सही एक बड़ी गाड़ी भी मिलेगी। यानी अगर आईएएएस बनने का सपना आपका अधूरा रह गया था तो ये एक अच्छा मौका है। इसकी डिटेल्स आप http://lateral.nic.in पर देख सकते हैं।