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चुनिंदा उत्पादों के मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगी सरकार, बाजार में बढ़ेगी हिस्सेदारी : गडकरी

सरकार का मकसद पहचान किए गए सेक्टर में विदेशी निवेश को आकर्षित करना है
अपडेटेड Aug 10, 2020 पर 19:30  |  स्रोत : Moneycontrol.com

आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने के लिए देश में जोर-शोर से काम शुरू हो गया है। अब हर सामान को देश में बनाने की प्राथमिकता दी जा रही है। सोमवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत सरकार चुनिंदा उत्पादों के मैन्युफैक्चरिंग (manufacturing) को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। खासकर उस सेक्टर में जहां चीन ग्लोबल मार्केट में आयात कम करता है और निर्यात ज्यादा करता है।


लाइव मिंट ने रायटर्स के हवाले से लिखा है कि गडकरी ने एक वर्चुअल मीटिंग को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का मकसद पहचान किए गए सेक्टर में विदेशी निवेश को आकर्षित करना, जाइंट वेंचर्स को बढ़ावा देना और ग्लोबल मार्केट में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए स्थानीय व्यवसायों को सपोर्ट करना है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए इस समय बेहतर अवसर है जहां चीन की ग्लोबल मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी है।
पिछले कुछ महीनों में, सरकार ने चीनी उत्पादों के आयात पर पाबंदी लगाते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइसेस और दवा उत्पादों (pharmaceutical products) के मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड प्रोत्साहन की घोषणा की है।


गडकरी का बयान ऐसे समय में आया है जब डिफेंस मिनिस्ट्री ने 101 आइटमों की लिस्ट तैयार करके आयात पर रोक लगाने की बात कही है। यह डिफेंस में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार के कदम से भारतीय defense manufacturing को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। डिफेंस मिनिस्ट्री ने सेना (Army), वायु सेना (Air Force), नौ सेना (Navy), DRDO, डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (Defence Public Sector Undertakings-DPSUs), ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (Ordnance Factory Board-OFB) और निजी उद्योग समेत सभी हितधारकों के साथ कई दौर की मीटिंग के बाद लिस्ट तैयार की गई है। साल 2015 से लेकर 2020 तक करीब 260 योजनाओं में तीनों सेनाओं ने करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट्स दिए थे। ऐसे में उन्होंने अनुमान जताया है कि अगले 6-7 साल में घरेलू कंपनियों को करीब लाख करोड़ रुपये तक के ठेके दिए जाएंगे।  


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