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सरकारी खर्च बढ़ने से मिली मदद, अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत: RBI गवर्नर

RBI मॉनेटरी पॉलिसी ने आज पॉलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं किया है और इसको 5.15 फीसदी पर बरकरार रखा है।
अपडेटेड Dec 06, 2019 पर 09:04  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लगातार 5 बार दरें घटाने के बाद इस बार रिजर्व बैंक ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट 5.15 फीसदी पर बरकरार रखी है। हालांकि रिजर्व बैंक ने साफ कर दिया है कि अगर जरूरत पड़ी तो आगे दरों में और कटौती करेंगे। इसके साथ ही रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांता दास ने कहा कि रिटेल महंगाई को ध्यान में रखते हुए आगे ग्रोथ पर फोकस करेंगे। RBI ने अक्टूबर-मार्च महंगाई दर का लक्ष्य बढ़ाकर 4.7-5.1 फीसदी रखा है। इसके साथ ही FY20 GDP ग्रोथ अनुमान 6.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। ग्राहकों के हित की बात करते हुए शक्तिकांता दास ने बैंकों को आड़े हाथों लिया। शक्तिकांता दास ने साफ कहा कि बैंक अब तक हुई रेट कटौती का फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचा रहे हैं।


अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत


इस मौके पर बोलते हुए RBI GOVERNOR ने कहा कि सरकारी खर्च बढ़ने से ग्रोथ को थोड़ी मदद मिली है। रबी की बुआई में भी थोड़ा सुधार दिखा है। अब अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। अक्टूबर तक सर्विस सेक्टर ग्रोथ में धीमापन रहा। लेकिन नवंबर में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। 3 दिसंबर तक देश के पास 45,170 करोड़ डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था। अक्टूबर में गैर-ऑयल एक्सपोर्ट में भी सुधार देखने को मिला है। हालांकि FY20 के Q3 तक बिजनेस सेंटीमेंट में धीमापन के संकेत हैं।


को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए रेगुलेटरी नियम जल्द


उन्होंने आगे कहा कि को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए रेगुलेटरी नियम जल्द लाए जाएंगे। को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए डेटा बेस बनाया जाएगा। FY21 में इनसे संबंधित सरकारी नीतियां ज्यादा साफ दिखेंगी।  स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़ी गाइडलाइंस आज आएंगी। घरेलू मांग में धीमापन ग्रोथ के लिए चुनौती  है। ग्राहकों तक रेट कटौती फायदा भी धीमा पहुंच रहा है। छोटी अवधि में महंगाई दर बढ़ने का अनुमान है। CPI को ध्यान में रखते हुए ग्रोथ पर फोकस किया जा रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि आगे दरों में कटौती की गुंजाइश है।


सरकार और RBI के बीच बेहतर तालमेल


RBI GOVERNOR ने कहा कि सरकार, RBI के बीच बेहतर तालमेल है। महंगाई कम करना हमारी प्राथमिकता है। जनवरी-मार्च में खाद्य महंगाई ज्यादा रहने की संभावना है। हालांकि कोर महंगाई दर 4 फीसदी के नीचे रहने का अनुमान है। अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। हालंकि डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में धीमापन देखने को मिल रहा है। लेकिन Capex में रिवाइल के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं।  कॉरपोरेट टैक्स कटौती से कंपनियों की बैलेंसशीट सुधरी है।


50 बड़ी NBFCs पर RBI की नजर


उन्होंने आगे कहा कि NBFCs के क्रेडिट फ्लो में सुधार आया है। इस बात का भरोसा है की कोई और बड़ी NBFC अब दिवालिया नहीं होगी। NBFCs की लिक्विडिटी पर अगले 3 महीने तक नजर रहेगी। 50 बड़ी NBFCs पर RBI की नजर है।


 


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