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सिंगल यूज प्लास्टिक पर हल्ला बोल, प्लास्टिक बैन को कैसे बनाएं असरदार!

प्लास्टिक बोतल का शानदार विकल्प खादी ग्रामोद्योग ने पेश किया है, ये है बांस की बोतल।
अपडेटेड Oct 03, 2019 पर 13:11  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

2 अक्टूबर महात्मा गांधी की 15वीं जयंति पर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो, आजाद भारत के नागरिक एक नया संकल्प लें, प्लास्टिक मुक्त भारत के लिए एक बार सिंगल यूज प्लास्टिक भारत छोड़ो का नारा बुलंद करें। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यही आह्वान किया था। सरकार सिंगल यूज प्लास्टिक को निकाल बाहर करने के लिए बड़े प्रयास कर रही है। पैकेजिंग के नियम बदले जा रहे हैं, विकल्प खोजे जा रहे हैं। खादी आयोग ने प्लास्टिक की बोतलों के विकल्प के तौर पर बांस की बोतलें तैयार की हैं।


आम दिलचर्या से प्लास्टिक को हटाने के मामले में अब तक के अनुभव बहुत अच्छे नहीं रहे हैं और इसकी वजह रही है कि प्लास्टिक बनाने, बेचने से लेकर इस्तेमाल तक पर एक साथ हल्लाबोल नहीं हुआ है। लेकिन अब जबकि सरकार के मुखिया ने खुद कमान थामी है और इसे गांधी जयंति के साथ जोड़ा है, तो कहना पड़ेगा कि अब तो मुमकिन है।


सरकार की पहल पर नजर डालें तो सिंगल यूज प्लास्टिक पर हल्ला बोला गया है। ये गांधी जयंति कार्यक्रम का हिस्सा भी बना है। 4000 शहरों, 6 लाख गांवों में  प्लास्टिक को हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। 3 से 27 अक्टूबर तक इस पर सघन अभियान चलाया जा रहा है। दफ्तरों, संसद, रेलवे में इसकी शुरुआत हो गई है।
केंद्र में इस पर अंतर मंत्रालय समिति बनी है। इस पर एकाएक या चरणों में बैन पर विचार किया जा रहा है।


प्लास्टिक का विकल्प


प्लास्टिक बोतल का शानदार विकल्प खादी ग्रामोद्योग ने पेश किया है, ये है बांस की बोतल। जी हां, गांधी जंयती के मौके पर ये बांस की बोतल लॉन्च हो रही है। इसके साथ ही गोबर और गोमूत्र से बना साबुन भी लॉन्च किया जा रहा है। इन नए इको फ्रैंडली प्रोडक्ट्स पर खादी ग्रामोद्योग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने बताया कि खादी ग्रामोद्योग के बांस के बोतल की क्षमता कम से कम 750 एमएल होगी। इसकी कीमत 300 रुपये से शुरू होगी। ये प्लास्टिक बोतल का विकल्प साबित होंगी। यह बोतलें पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ टिकाऊ भी हैं।


FSSAI की पहल


प्लास्टिक बोतल की रिसाइक्लिंग होगी। FSSAI ने रिसाइक्लिंग के नियम बदले हैं। बोतल के दोबारा इस्तेमाल पर रोक हटा दी गई है। रिसाइक्लिंग के लिए बिजनेस  मॉडल बनाए गए हैं। बांस से बनी चीजों को बढ़ावा दिया जाएगा। बांस के प्रोडक्ट के लिए गाइडलाइन तैयार की गई है।


कंज्यूमर मंत्रालय की पहल


प्लास्टिग पैकिंग में बदलाव के लिए पहल की गई है। इसके लिए पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर कंपनियों से बात की जा रही है। PEPSI, COCA COLA जैसी कंपनियों से बात
हुई है और इनसे पैकिंग के विकल्प ढूंढने को कहा गया है।


प्लास्टिक बैन में दिक्कतें


रातों रात प्लास्टिक बैन लगाने में दिक्कत कई दिक्कतें हैं। बैन लागू करवाना एक चुनौती है। बड़ी कंपनियां इससे छूट ले लेती हैं। प्लास्टिक का सस्ता विकल्प भी नहीं है। प्लास्टिक बैन से छोटे कारोबारियों के धंधे पर संकट आ जाएगा। लोगों में पर्यावरण को लेकर जागरूकता भी नहीं है।


प्लास्टिक का जंजाल


भारत में प्लास्टिक कचरा बड़ी समस्या है। भारत में रोजाना 25,940 टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। इसमें से 10,376 टन कचरा यूं ही बिखर जाता है। देश के 60 शहर 20 फीसदी कचरा पैदा करते हैं। इसमें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई सबसे आगे हैं। कोलकाता, बंगलुरु में भी ज्यादा कचरा होता है। देश में प्रति व्यक्ति 11kg सालाना प्लास्टिक खपत है। अमेरिका में प्रति व्यक्ति 109Kg खपत है। दुनिया में औसत 28Kg प्रति व्यक्ति खपत है। बता दें कि प्लास्टिक की बोतल 400 साल में खत्म होती है। दुनिया में 6.3 अरब टन प्लास्टिक कचरा जमा है। इसका 80 फीसदी इस्तेमाल पैकेजिंग इंडस्ट्री में होता है।



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