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बच्चों को यौन शोषण से कैसे बचाएं, अच्छा-बुरा कैसे सिखाएं?

यौन शोषण का मामला सामने आने पर पुलिस को 100 नंबर पर डायल करें। पुलिस FIR ना करे तो SP के पास जाएं।
अपडेटेड Aug 16, 2019 पर 11:23  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अखबारों में लगभग रोज पढ़ने को मिलता है कि कोई बच्चा किसी की हवस का शिकार हो गया। कभी स्कूल में, कभी आस पड़ोस में तो कभी किसी बाल सुधार गृह में। मगर क्या आपको पता है कि ये बाल यौन शोषण की एक हल्की सी झलक है। रिसर्चर्स का दावा है कि देश में हर दो में से एक, जी हां, लगभग आधे बच्चे कभी ना कभी यौन शोषण का शिकार होते हैं।


ये एक ऐसा दर्द है जिसे अक्सर बच्चे किसी को बताते तक नहीं। जिंदगी भर जख्म लेकर जीते हैं। ऐसी घटनाओं का हमारे शरीर और मन पर गहरा असर होता है। इतना गहरा कि इससे हमारी सेहत, हमारा व्यक्तित्व, हमारा करियर, सोशल लाइफ सबकुछ खराब हो सकता है। आज कंज्यूमर अड्डा में हम इसी समस्या को समझने की कोशिश करेंगे और ये भी पता लगाएंगे कि कैसे इससे बचा जा सकता है।


इस विषय में सीएनबीसी-आवाज़ पर चर्चा के लिए चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर अनुजा कपूर, GAIA ग्रीन स्कूल की प्रिंसपल अदिति जैन और RIA फाउंडेशन की फाउंडर रिया रहेजा उपस्थित हैं।


भारत में बाल यौन शोषण


भारत में 53 प्रतिशत बच्चे किसी ना किसी रुप में शिकार हैं। सिर्फ 6 प्रतिशत पीड़ित शिकायत करते हैं। इनमें से 50 प्रतिशत अपराधी बच्चे के पूर्व परिचित होते हैं। ज्यादातर मामलों में अपराधी रिश्तेदार होते हैं। यहां तक कि घर के भीतर भी बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। डर की वजह से बच्चे शिकायत नहीं करते हैं। पारिवारिक प्रतिष्ठा में मामले दब जाते हैं।


देश में बाल श्रमिकों के उत्पीड़न का खतरा ज्यादा रहता है। अनाथ, आपदा पीड़ित बच्चों पर भी खतरा बना रहता है। लापता बच्चे बाल वैश्यावृति के शिकार हो जाते हैं। गरीबी, असुरक्षित आवास इस बड़ी वजह है। अनाथों के लिए व्यवस्था ना होना भी एक वजह है। लड़के, लड़कियों दोनों को यह खतरा समान रूप से होता है।


बच्चों का यौन शोषण


बच्चों का यौन शोषण क्या है इस पर बात करें तो सेक्स के लिए बच्चे का इस्तेमाल होना। गलत तरीके से बच्चे को छूना। बच्चे के साथ सेक्सुअल गतिविधि करना।


वयस्क गतिविधि में बच्चे को रखना। बच्चे को अश्लील सामग्री दिखाना। पोर्नोग्राफी में बच्चों का इस्तेमाल करना। बड़े बच्चे के हाथों मासूम का शोषण होना यह सब बच्चों के यौन शोषण की श्रेणी में आते हैं।


बच्चे को ये जरूर सिखाएं


बच्चे को शरीर की प्राइवेसी के बारे में बताएं। बॉडी पार्ट्स की बुनियादी जानकारी दें। अच्छे और बुरे स्पर्श का अंतर बताएं। दूसरे की प्राइवेसी का सम्मान करना बताएं। मां-बाप से हर बात शेयर करना जरूरी है। लालच देने वालों से सावधानी रखना सिखाएं।


एहतियात से बचाव


बच्चे की गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखें। बच्चे के साथ वक्त दें, उनका विश्वास जीतें। सेक्सुअल टॉपिक भी शर्म की बात नहीं है। यौन शोषण की खबरों के बहाने बात करें।


संकेत मिले तो ध्यान दें


कभी भी बच्चा कुछ इशारा करे तो ध्यान दें। पीड़ित खुलकर बोले ये जरूरी नहीं होता है। किसी करीबी की शिकायत करे तो उसे डांटें नहीं। बच्चे को विश्वास में लेकर बात करें। बच्चे को बताएं कि उसका दोष नहीं है। बच्चे को भरोसा दें कि आप उसके साथ हैं। खुद समझ ना पाएं तो मदद लें। चाइल्ड हेल्पलाइन, डॉक्टर की मदद लें।


बाल यौन शोषण का असर


बाल यौन शोषण का असर कई बार बहुत गहरा और गंभीर हो सकता है। यौन शोषण का पूरे जीवन पर असर पड़ता है। बच्चा समझ नहीं पाता कि क्या हुआ। घटना को छिपाने की कोशिश करता है। बच्चा खुद को जिम्मेदार मान लेता है। अपराधबोध और शर्म महसूस करता है। जीवन भर बुरी यादें पीछा करती हैं। संबंध बनाने में असहज महसूस करते हैं। कभी-कभी गहरे डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। आत्मविश्वास की कमी हो सकती है। करियर, हेल्थ पर भी असर पड़ सकता है।


कहां करें शिकायत


यौन शोषण का मामला सामने आने पर पुलिस को 100 नंबर पर डायल करें। पुलिस FIR ना करे तो SP के पास जाएं। SP भी ना सुने तो मजिस्ट्रेट के पास जाएं। मजिस्ट्रेट FIR, जांच करवा सकते हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग को लिखें। //ncpcronline.info पर जाकर शिकायत करें। आयोग के पते पर लिखित शिकायत करें। मानवाधिकार आयोग भी शिकायत सुनेगा। मानवाधिकार आयोग की वेबसाइट nhrc.nic.in/ है। चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 पर कॉल करें।


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