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IBC के जरिए 70 हजार करोड़ की वसूली: क्रिसिल

प्रकाशित Wed, 15, 2019 पर 10:19  |  स्रोत : Moneycontrol.com

टाइम पर कंपनियों का भुगतान और सही संचालन नहीं होने पर लिक्विडिटी (तरलता) और बैंकरप्ट (दिवालिया) का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में दिवाला कानून ( Insolvency and Bankruptcy Code) यानी आईबीसी के जरिए मामले सुलझाए जा रहे हैं। साल 2018-19 में आईबीसी के जरिए 70,000 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। जो दूसरे नियमों के तहत संकटग्रस्त कर्ज (स्ट्रेस्ड एसेट्स) की वसूली के मुकाबले दो गुना है। लेकिन बैड लोन के लिए रिजॉल्यूशन टाइमलाइन (लगने वाला समय) अब भी एक बड़ा मुद्दा है।


 


क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक,  साल 2018-19 में आईबीसी के जरिए संकट ग्रस्त कर्ज (स्ट्रेस्ड एसेट्स) की वसूली दूसरे माध्यमों के मुकाबले दो गुना 70,000 करोड़ रुपये रही। इसी दौरान डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल यानी डीआरटी, सिक्योरिटी एंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंसिएल एसेट्स (सरफेसी), इनोफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटीज इंट्रेस्ट एक्ट और लोक अदालत के जरिए फंसे कर्ज की वसूली 35,000 करोड़ रुपये रही।




प्रेसीडेंट गुरप्रीत चटवाल के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018-19 में 94 मामलों को सुलझाने की दर 43 फीसदी रही। जबकि इसके पहले साल 26.5 फीसदी रहा। आगे उन्होंने कहा कि, आईबीसी के जरिए ही 94 मामलों को सुलझाना संभव हो सका है।




वेबसाइट में दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, 4,452 मामलों में तकरीबन 2.02 लाख रुपये कर्ज से जुड़े मामलों को आईबीसी में जाने के पहले ही सुलझा दिया गया।




आईबीसी के जरिये मामलों को सुलझाने के लिए औसत रिजॉल्यूशन टाइम लाइन (लगने वाला औसम समय) 324 दिन है जो पहले के मुकाबले 4.3 साल से बेहतर है। लेकिन अभी भी कोड में निर्धारित 270 दिन से अधिक है।