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अगर आप बिजनेस करने की सोच रहें हैं तो Trout Fish Farming पर कर सकते हैं विचार

मछली पालन से किसानों की आमदनी पांच गुनी हो सकती है।
अपडेटेड Jan 19, 2020 पर 09:28  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मछली पालन में अपार संभावनाएं हैं और इससे किसानों की आमदनी पांच गुनी हो सकती है। मछली पालन क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने दो विधेयकों का मसौदा तैयार किया है और ये विधेयक संसद के चालू सत्र में ही पेश होगा, इन विधेयकों में एक राष्ट्रीय समुद्रीय मछली पालन नियमन और प्रबंधन विधेयक शामिल हैं।


मछली किसानों के मेकेनाइजेशन पर जोर दिया जा रहा है। देश के 11 लाख हेक्टेयर बैक वाटर में मछली पालन की बहुत संभावनाएं हैं। देश के भीतर जिन राज्यों में खारा पानी है, अब वहां झींगा की खेती होगी। 19509 किलोमीटर लंबाई की नदियों में मछली पालन की योजना है। देश में 25 लाख हेक्टेयर से अधिक रकबा में पोखर, तालाब और जलाशय हैं। इनमें उत्पादन केवल तीन टन प्रति हेक्टेयर है, जिसे बढ़ाया जा सकता है।


यानी अगर आप बिजनेस करने की सोच रहे हैं तो Trout Fish Farming पर विचार कर सकते हैं। इस बिजनेस की खासियत है कि इसे शुरू करने के लिए नाबार्ड 20 फीसदी सब्सिडी देती है। नाबार्ड के मुताबिक सिर्फ 2.3 लाख रुपये में ट्राउट फार्मिंग शुरू की जा सकती है सब्सिडी मिलने पर खुद की जेब से सिर्फ 1.8 लाख रुपये का ही निवेश करना होगा।


नाबार्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्राउट एक प्रकार की मछली है, जो साफ पानी में पाई जाती है। भारत के कुछ राज्‍यों में यह मछली बड़ी तादात में पाई जाती है। इनमें हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू कश्‍मीर, उत्‍तराखंड, तमिलनाडु, करेल प्रमुख है। इन राज्‍यों में ट्राउट प्रोडक्‍शन के लिए इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर भी उपलब्‍ध है. राज्‍य सरकारों द्वारा ट्राउट फिश फार्मिंग को प्रमोट करने के लिए कई इन्‍सेंटिव प्रोग्राम भी चलाए जा रहे हैं।


रिपोर्ट के मुताबिक, 15X2X1.5 मीटर का रेसवे बनाने पर करीब एक लाख रुपये का खर्च आएगा जबकि लगभग 6 हजार रुपये में इक्‍विपमेंट्स आ जाएंगे, जिसमें हैंड नेट, बाल्‍टी, टब, थर्माकोल बॉक्‍स शामिल है जबकि 22,500 रुपये में सीड और 1.45 लाख रुपये में फीड पर खर्च होगा।


रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले साल में आपकी बिक्री करीब 3.23 लाख रुपये की होगी, लेकिन अगले साल से आपकी कैपिटल कॉस्‍ट घट जाएगी और आपकी बिक्री 3.50 लाख रुपये होगी।


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