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आईएलएंडएफएस मामलाः एनसीएलटी पहुंचा, काम करेगा सरकार का एक्शन!

प्रकाशित Mon, 01, 2018 पर 16:48  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आईएलएंडएफएस के संकट पर सरकार एक्शन में आ गई है। कार्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय कंपनी के खिलाफ एनसीएलटी में पहुंच गया है। इसे बचाने के लिए सरकार कुछ भी कर सकती है। अधिग्रहण कर सकती है, बोर्ड को भी सरकार अपने कब्जे में ले सकती है। पूरा मैनेजमेंट बदला जा सकता है।


खबर ये है कि सरकार उदय कोटक को नॉन एक्जिक्यूटिव चेयरमैन बनाना चाहती है। कुल मिलाकर सरकार आईएलएंडएफएस के लिए वो कदम उठा सकती है जो उसने आईटी कंपनी सत्यम के लिए उठाए थे।


दरअसल कंपनी पर 91 हजार करोड़ का कर्ज है, जिसे चुकाने में नाकामी की शुरुआत हो चुकी है। ये पैसे बैंकों के हैं। कंपनी में म्युचुअल फंडों का भी पैसा लगा है और पेंशन और प्रोविडेंड फंड का भी पैसा लगा है। आईएलएंडएफएस  पुराने कर्ज चुकाने में बार-बार डिफॉल्ट हो रही है।


कंपनी को अब लोन नहीं मिल सकता और ये बाजार से पैसे जुटाने में भी नाकाम है, क्योंकि इसकी रेटिंग जंक स्टेटस में बदल चुकी है। मसला बड़ा है अगर आईएलएंडएफएस डूबी तो सबकुछ एक झटके में बर्बाद हो जायेगा।


कंपनी के डिफॉल्ट पर आईसीआरए ने रेटिंग घटाई है, जिसके बाद निवेशक, बैंकों, म्यूचुअल फंड में घबराहट का माहौल बना हुआ है। इक्विटी इंवेस्टर्स में अफरा-तफरी मची है जबकि दूसरे एनबीएफसी में भी उठा पटक मची है।


एनसीएलटी ने सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आईएलएंडएफएस में 6 सदस्यों का नया बोर्ड बनेगा। बोर्ड के अध्यक्ष उदय कोटक होंगे।  बोर्ड के सदस्यों में विनित नायर, जी एन वाजपेयी, आईएएस मालिनी शंकर, आईसीआईसीआई बैंक के जी सी चतुर्वेदी और नंद किशोर भी शामिल होगें। 8 अक्टूबर को नए बोर्ड की पहली बैठक होगी।