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ट्रांसपोर्टरों के लिए जीएसटी की जरूरी बातें

जानिए जीएसटी लागू होने के बाद देश में सामान ट्रांसपोर्ट के तौर तरीके किस तरह बदल जाएंगे।
अपडेटेड Apr 27, 2017 पर 11:26  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जीएसटी युग में ऑल इंडिया परमिट वाले ट्रांसपोर्टरों को फायदा होगा लेकिन स्टेट परमिट वालों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। जानिए जीएसटी लागू होने के बाद देश में सामान ट्रांसपोर्ट के तौर तरीके किस तरह बदल जाएंगे।


अगर आप ट्रांसपोर्ट का कारोबार करते हैं या फिर अपना सामान किसी ट्रांसपोर्टर के जरिये एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जा रहे हैं तो हम जो आगे बताने जा रहे हैं उसे ध्यान से देखिए वरना मुसीबत में पड़ जाएंगे। दरअसल जीएसटी लागू होने के बाद माल की ढुलाई के लिए एक यूनिक आईडी जरूरी होगी। बगैर यूनिक आईडी के अगर माल ढुलाई करेंगे तो उसे जब्त कर लिया जाएगा। ये यूनिक आईडी माल ढुलाई करने वाली गाड़ी के ड्राइवर के पास होनी चाहिए।


अगर ट्रांसपोर्टर को सामान किसी ऐसे राज्य में ले जाना है जहां की उसके पास परमिट नहीं है तो उसे ना सिर्फ दूसरे राज्य की परमिट वाले ट्रांसपोर्टर को ढूढ़ना होगा बल्कि जैसे ही सामान दूसरी गाड़ी में लोड होगा उसे आईडी भी बदलनी होगी। क्योंकि यूनिक आईडी में सामान की डीटेल्स के अलावा गाड़ी नंबर जैसी जानकारी भी होगी। इतना ही नहीं गाड़ी खराब होने की स्थिति में अगर गाड़ी बदलते हैं तो भी यूनिक आईडी या तो बदलनी होगी या डिटेल्स बदलने होंगे। ये यूनिक आईडी ट्रांसपोर्टर या सामान भेजने वाला या फिर सामान मंगाने वाला जेनरेट कर सकता है।


जानकारों की मानें तो नई व्यवस्था के तहत वैसे ट्रांसपोर्टर फायदे में रहेंगे जिनके पास ऑल इंडिया परमिट है। दूसरी तरफ, अगर चुनिंदा स्टेट की परमिट वाले ऑल इंडिया परमिट लेने जाएंगे तो उन्हें भारी भरकम रकम फीस के तौर पर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को चुकानी होगी। कुल मिलाकर जीएसटी युग में बगैर यूनिक आईडी के माल ढुलाई करना संभव नहीं होगा। क्योंकि हर ट्रांसपोर्ट अधिकारी के पास एक खास डिवाइस होगी। इसमें यूनिक आईडी डालने पर सामान और गाड़ी की पूरी डिटेल सामाने आ जाएगी। इस तरह से इस डिवाइस के सहारे अधिकारी ये जांच कर सकते हैं कि ढुलाई किये जा रहे सामान पर टैक्स दिया गया है या नहीं।