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₹20 लाख करोड़ के मेगा पैकेज में आइए जानते हैं किसको मिल सकता है कितना!

सूत्रों के मुताबिक MSMEs और एग्रो सेक्टर को सबसे बड़ा हिस्सा मिल सकता है। बड़ी इंडस्ट्री को कम वित्तीय राहत मिल सकती है।
अपडेटेड May 13, 2020 पर 16:26  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

PM मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपए के मेगा पैकेज का एलान कर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन आज इसके कुछ ब्यौरे देंगी। लेकिन CNBC-आवाज़ के इकोनॉमिक एंड पॉलिसी एडिटर लक्ष्मण रॉय को Exclusive जानकारी मिली है कि पैकेज में क्या-क्या हो सकता है। तो आइए जानते हैं 20 लाख करोड़ रु के पैकेज का ब्रेकअप क्या होने वाला है।


मेगा पैकेज : किसे, कितना मिलेगा?



सूत्रों के मुताबिक MSMEs और एग्रो सेक्टर को सबसे बड़ा हिस्सा मिल सकता है। बड़ी इंडस्ट्री को  कम वित्तीय राहत मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक रिफॉर्म के जरिए ज्यादा राहत देने पर जोर रहेगा।  सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक एग्री इंडस्ट्री को 3.5 लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं । MSMEs को करीब 2.8 लाख करोड़ रुपये और NBFCs/HFCs को करीब 1 लाख करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं।


सूत्रों के मुताबिक टैक्स के मोर्चे पर करीब 50,000 करोड़ की राहत संभव है। पावर सेक्टर को करीब 90,000 Cr की राहत मिल सकती है। हाउसिंग, फिशरीज जैसे सेक्टर को भी पैकेज में हिस्सा संभव है। डायरेक्ट कैश ट्रांसफर से बड़ी रकम मिल सकती है। असंगठित क्षेत्र के लोगों को बड़ी मदद मिल सकती है।


सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबित ये राहत पैकेज 3-4 किस्तों में आ सकता है। पहली किस्त में MSME,पर फोकस  रहेगा। पहली किस्त में NBFCs,HFCs और टैक्स पर ऐलान संभव है। दूसरी किस्त में एग्रीकल्चर सेक्टर पर फोकस रह सकता है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक पावर सेक्टर को भी राहत मिलने की संभावना है। तीसरी, चौथी किस्त में सेक्टोरल रिफॉर्म पर फोकस रहेगा। कोल, माइनिंग, सिविल एविएशन, इंफ्रा, डिफेंस सेक्टर में रिफॉर्म पर फोकस रहेगा।


सूत्रों के मुताबिक एग्री मार्केटिंग में बड़े रिफॉर्म का एलान संभव है। इस राहत पैकेज में किसानों को तय रिटर्न की गारंटी पर जोर हो सकता है। लेबर रिफॉर्म पर राज्यों को मॉडल कानून दिया जा सकता है। इसके अलावा इसमें FDI रिफॉर्म पर जोर हो सकता है। निवेश की शर्तों में भी ढील दी जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक बड़ी संख्या में प्रोडक्ट इंपोर्ट पर ड्यूटी लगाई जा सकती है। टैक्स स्ट्रक्चर में भी बड़े बदलाव की संभावना है।


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