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घर खरीदारों का बढ़ा दर्जा, इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया में मिलेगा हक!

प्रकाशित Mon, 12, 2018 पर 18:21  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रियल एस्टेट कंपनी के दिवालिया होने पर इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत घर खरीदारों को अनसिक्योर्ड फाइनेंशियल क्रेडिटर्स का दर्जा दिया जा सकता है।


सूत्रों के मुताबिक इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की समीक्षा कर रही कमिटी ने ये प्रस्ताव दिया है जिस पर सरकार विचार कर रही है। अगर ये सिफारिशें लागू होती हैं तो घर खरीदार क्रेडिटर्स कमिटी का हिस्सा बन सकेंगे और इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया में खरीदारों की बराबर भागीदारी होगी। घर खरीदारों को रिजॉल्यूशन प्लान पर वोटिंग का हक भी मिलेगा। फिलहाल खरीदार हर्जाना मिलने की स्थिति में सबसे निचले पायदान पर घर खरीदार होता है।


बता दें कि घर खरीदारों के जेपी इंफ्रा के 31,000 खरीदारों का पैसा फंसा है जबकि आम्रपाली के 41,000 खरीदारों को घर का इंतजार है। घर खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्हें फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के बराबर मानने की अपील गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने जेपी इंफ्रा के प्रमोटर्स को 2,000 करोड़ जमा कराने का आदेश दिया था। वहीं आम्रपाली को घर देने की योजना कोर्ट में पेश करने को कहा था।


आईडीबीआई बैंक ने जेपी इंफ्रा और बैंक ऑफ बड़ौदा ने आम्रपाली का मामला एनसीएलटी में भेजा था। कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय ने बैंकरप्सी कोर्ट में कदम बढ़ाया और यूनिटेक का कंट्रोल लेने के लिए कदम बढ़ाया।


देशभर में सैंकड़ों रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट अटके है जिसके कारण घर खरीदारों के करोड़ों रुपए फंसे है। कई बिल्डरों पर पैसों की हेराफेरी का आरोप लगा है। रेरा के बाद बिल्डरों पर और शिकंजा कसा है। बिल्डरों का ऑडिट कराया जा रहा है और उनसे पैसों का हिसाब मांगा जा रहा है। सरकार ने दिवालिया होने की प्रक्रिया आसान की है। जिसके तहत रियल एस्टेट कंपनी की संपत्ति बेचकर रकम की वसूली की जायेगी।रिजॉल्यूशन प्रक्रिया में घर खरीदारों को प्राथमिकता नहीं है।