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दवा बनाने में उपयोग होने वाले कच्चे माल के आयात पर 15% तक बढ़ सकता है सीमा शुल्क

भारत में दवाई बनाने के लिए 70 फीसदी से अधिक एपीआई का आयात चीन से होता है
अपडेटेड Aug 02, 2020 पर 15:24  |  स्रोत : Moneycontrol.com

भारत सरकार ने दवाई बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल यानी एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट (एपीआई) के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की कवायद शुरू कर दी है। इसके मद्देनजर सरकार एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट (APIs) के आयात पर 10 से 15 फीसदी सीमा शुल्क (Custom Duty) बढ़ा सकती है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्थानीय स्तर पर ही दवाओं के लिए अधिक से अधिक कच्चे माल के उत्पादन को बढ़ावा देना है।


एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार का फार्मास्यूटिकल्स विभाग (DoP) एपीआई पर सीमा शुल्क 25 फीसदी करने का विचार कर रही है। अभी एपीआई पर कस्टम ड्यूटी 10 फीसदी है। हालांकि, मनी कंट्रोल इस रिपोर्ट की पुष्टि नहीं करता है। फार्मा विशेषज्ञ केंद्र सरकार के इस फैसले को अभी अव्यवहारिक बता रहे हैं। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में हम अभी आत्मनिर्भर नहीं हैं। इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से फार्मा उद्योग (Pharma Industry) पर नकारात्मक असर पड़ेगा। 


70% एपीआई का आयात चीन से


अभी भारत में दवाई बनाने के लिए 70 फीसदी से अधिक एपीआई का आयात चीन से होता है। वहीं, एंटीबायोटिक दवाएं बनाने के लिए 90 फीसदी एपीआई का आयात चीन से होता है। भारत वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा फार्मा उद्योग है। भारत इन दिनों चीन से कम से कम 53 तरह के फार्मा एपीआई का आयात करता है। इसमें टीबी, स्टीरॉयड और विटामिन जैसी दवाएं शामिल हैं। भारत मेडिकल डिवाइस बनाने के लिए भी चीन से कच्चे माल का आयात करता है। इसके साथ ही फार्मा की पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक, पोलीमर और छोटे कंपोनेंट भी बड़ी तादाद में चीन से मंगाए जाते हैं। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले चार सालो में चीन से आयात होने वाले फार्मा प्रोडक्ट में 28 फीसदी की तेजी आई है। साल 2015-16 में भारत ने चीन से 947 करोड़ का आयात किया था जो 2019-20 में बढ़ कर 1150 करोड़ रुपये का हो गया है।


10 हजार करोड़ की स्कीम लॉन्च


सरकार ने घरेलू स्तर पर कच्चे माल का उत्पादन बढ़ाने और एपीआई के लिए चीन से अपनी निर्भरता कम करने के लिए जुलाई में 10 हजार करोड़ रुपये की एक स्कीम लॉन्च की। इसके अतिरिक्त 53 अति जरूरी एपीआई का उत्पादन करने वाली हरेक भारतीय कंपनी को 10 करोड़ रुपये का इन्सेंटिव देने का भी ऐलान किया।


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