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India Post Payments Bank की हालत कमजोर, सैलरी देने तक के लिए नहीं है पैसे

RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के समय में शुरु किया गया India Post Payments Bank आज अंतिम सांसें गिन रहा है।
अपडेटेड Oct 24, 2019 पर 10:11  |  स्रोत : Moneycontrol.com

धूम धाम से लॉन्च किया गया India Post Payments Bank (IPPB) की मौजूदा समय में हालत बेहद खस्ता चल रही है। बैंक के पास सैलरी देने तक के पैसे नहीं है। बैंक के पास कोई बड़ा बिजनेस नहीं है, जिससे बैंक अपनी आर्थिक तंगी दूर कर सके।


डाक विभाग IPPB बैंक को ऑपरेट करने में सक्षम नहीं है और बैंक में नई भर्तियों पर रोक लगी हुई है। क्यों कि बैंक के पास फंड की कमी है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि डाक विभाग 1 लाख रुपये ज्यादा नहीं जमा कर सकता और न ही किसी को लोन दे सकता। लिहाजा विभाग ने RBI से इसे Small Finance Bank के तौर पर मंजूरी देने की मांगी है। 


इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि बैंक को उम्मीद है कि RBI अगले साल तक Small Finance Bank के तौर पर बदलने की मंजूरी दे सकता है।


Small Finance Bank बनने पर लोन देना शुरु किया जा सकता है, जिससे बैंक की आर्थिक हालत को ठीक किया जा सकता है।


सूत्रों के मुताबिक बैंक को जब लॉन्च किया गया था भारी भरकम फंड खर्च किया गया था। जिसमें 1,000 करोड़ रुपये से अधिक टेक्नोलॉजी पर खर्च किए गए थे। जिसमें कोर बैंकिंग सिस्टम और दूसरी संबंधित टेक्नोलॉजी शामिल है। बैंक को ऐसी टेक्नोलॉजी की शायद जरूरत भी नहीं थी। मैनपॉवर की लागत भी बढ़ने लगी है जिसमें 250 करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है। 


पेमेंट बैंक की उपज पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन के दिमाग की उपज थी। जिसमें ऐसे बैंक बनाए गए थे, जो किसी को लोन नहीं देंगे। इसके अलावा अकाउंट में केवल 1लाख रुपये से अधिक नहीं जमा कर सकते। ये बैंक लोन नहीं देंगे और दूसरी बैंक कि सुविधाएं नहीं देंगे। इन बैंकों को खोलने मकसद था कि दूर-दराज इलाकों में लोगों को बैंकिंग सुविधा मिल सके।
 
IPPB बैंक 650 ब्रांच के साथ लॉन्च किया गया था। इसके अलावा डाक घरों में केवल 3250 एक्सेस प्वाइंट बनाए गए थे।


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