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कोरोना की दूसरी लहर का असर, भारत के इन्वेस्टमेंट ग्रेड स्टेटस पर लटकी तलवार

पिछले साल कई क्रेडिट एजेंसियों द्वारा की गई डाउनग्रेडिंग के चलते भारत का इन्वेस्टमेंट ग्रेड स्टेटस पहले से ही मुश्किल में था.
अपडेटेड May 14, 2021 पर 10:06  |  स्रोत : Moneycontrol.com

भारत में कोविड-19 की दूसरी विनाशकारी लहर ने भविष्य के इकोनॉमिक सुपरपावर के रुप में उभर रहे भारत के इन्वेस्टमेंट ग्रेड स्टेटस को लेकर चिंता उत्पन्न कर दी है।


पिछले साल कई क्रेडिट एजेंसियों द्वारा की गई डाउनग्रेडिंग के चलते भारत का इन्वेस्टमेंट ग्रेड स्टेटस पहले से ही मुश्किल में था। इसी बीच कोरोना की दूसरी लहर ने दिक्कतें और बढ़ा दी है। जिसके चलते  S&P, Moodys और  Fitch जैसी बड़ी एजेसियां एक बार फिर भारत की रेटिंग घटा सकती है।


इन तीनों एजेसिंयो ने या तो कंपनी की ग्रोथ फॉर कास्ट में कटौती कर दी है या आगे कटौती करने का अलर्ट जारी कर दिया है। उम्मीद है कि इस साल जीडीपी के शेयर के रुप में सरकारी कर्ज का स्तर रिकॉर्ड 90 फीसदी का लेवल पार कर सकता है। इस नजरिए से भी दुनिया के सबसे बड़े आबादी वाले देश में काफी लंबे समय से विसंगति देखने को मिलती रही है।


कोविड-19 के बढ़ते मामलों की वजह से लगभग हर स्तर पर बढ़ते कर्ज को देखते हुए रेटिंग एजेसिंयां इस बात का संकेत दे रही हैं कि वे कोई निर्णय लेने के पहले कोरोना की ताजी लहर के ठंडे होने का इंतजार करेंगी। इसके साथ ही ऐसे निवेशक जो बॉन्ड जैसे ब्याज दरों से जुड़े एसेट में निवेश करते हैं उनका भी अपना नजरिया है।


एन एन इन्वेस्टमेंट पार्टनर के हेड ऑफ एशियन डेट Joep Huntjens का कहना है कि हम अभी भी भारत को इन्वेस्टमेंट ग्रेड में रखते हैं। उनका मानना है कि जल्दी ही देश की इकोनॉमी में बाउंसबैक देखने को मिलेगा लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि संभवत: अगले वर्ष कम से कम किसी एक रेटिंग एजेंसी द्वारा भारत के  इन्वेस्टमेंट ग्रेड में डाउनग्रेडिंग करने की 50-50 फीसदी संभावना है।


कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक और नेशनल लॉकडाउन की मांग देखने को मिल  रही है। इससे भी चिंताए बढ़ रही हैं।


UBS का कहना है कि भारत जल्द ही जंक रेटेड ब्राजील और अर्जेंटीना के बाद 3 सबसे ज्यादा कर्जदार देश बन जाएगा। UBS के एनालिस्ट का यह भी अनुमान है कि पब्लिक डेट को स्थिर करने या इसको घटाने के लिए प्रति वर्ष 10 फीसदी की दर से ग्रोथ करना होगा। लेकिन World Bank के आकंड़ो से पता चलता है कि 1988 के बाद से भारत इस विकासदर के आसपास भी नहीं रहा है।


पिछले साल के फुल लॉकडाउन की वजह से पहली तिमाही में इकोनॉमी में 24 फीसदी का संकुचन को देखने को मिला और इसी हफ्ते मुडीज ने कहा है कि इस बात का अनुमान है कि भारत की विकास दर लॉन्ग टर्म में 6 फीसदी के आसपास रहेगी।


UBS के हेड ऑफ इर्मजिंग मार्केट स्ट्रेटजी मानिक नारायण का कहना है कि भारत के  इन्वेस्टमेंट ग्रेड की डाउनग्रेडिंग निश्चित तौर पर होगी। जिसको देखते हुए सवाल यह नहीं है कि यह होगी या नहीं होगी । सवाल सिर्फ यह है कि यह कब होगी।


अगर भारत की इन्वेस्टमेंट ग्रेड डाउनग्रेडिंग होती है तो यह पहली बार नहीं होगा। इसके पहले भी देश 1991 में अपना इन्वेस्टमेंट ग्रेड स्टेटस  गवां चुका है।


भारत के पूर्व इकोनॉमिक अफेयर सेक्रेटरी सुभाष चंद्र गर्ग का कहना है कि सरकार का डबल डिजिट घाटा और ओवर ऑल डेट पोजिशन इकोनॉमी के सहेत के लिए अच्छे नहीं है लेकिन उनका यह भी मानना है कि रेटिंग फर्म भारत की रेटिंग डाउनग्रेड नहीं करेगी।



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