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Coronavirus crisis: मार्च में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 4 महीने में सबसे कम

मार्च में भारत की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां पिछले चार महीनों में सबसे धीमी गति से बढ़ी हैं
अपडेटेड Apr 05, 2020 पर 11:09  |  स्रोत : CNBC-TV18

एक प्राइवेट सर्वे में ये बात निकल कर आई है कि मार्च में भारत की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां पिछले चार महीनों में सबसे धीमी गति से बढ़ी हैं। देश में कोरोना आउटब्रेक के चलते आगे भी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कमजोरी देखने को मिलेगी। कोरोना आउटब्रेक के चलते कारोबारी सेंटीमेंट पर काफी खराब असर पड़ा है।


पिछले हफ्ते सरकार और आरबीआई की तरफ से आए राहत पैकेजों के बावजूद दुनिया के दूसरे सबसे ज्यादा आबादी वाले इस देश में 25 मार्च से लागू 21 दिनों के लॉक डाउन का इकोनॉमी पर काफी बड़ा प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।


IHS Markit द्वारा संकलित किया जाने वाला  Nikkei Manufacturing Purchasing Managers Index पिछले महीने गिरकर 51.8 के स्तर पर आ गया जो फरवरी में 54.5 के स्तर पर था। ये नवंबर के बाद का सबसे निचला स्तर है। लेकिन अभी भी ये 50 के स्तर ऊपर है जो कुछ अच्छा संकेत है।


IHS Markit के इकोनॉमिस्ट Eliot Kerr का कहना है कि  मार्च में भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर दुनियाभर में कोरोना वायरस के निगेटिव असर से तुलनात्मक रुप से बचे रहे। हालांकि हमें कहीं-कहीं कोरोना के बढ़ते डर का असर दिखना शुरू हो गया। कोरोना से बढ़ती परेशानी का सबसे साफ संकेत एक्सपोर्ट ऑर्डर और फ्यूचर एक्टीविटी सूचकांकों से मिले जो गिरते ग्लोबल डिमांड और कमजोर पड़ते घरेलू कारोबार की और संकेत कर रहे हैं।


इस सेक्टर की मांग को ट्रैक करने वाला एक सब-इंडेक्स विदेशी मांग घटने की वजह से 4 महीने के निचले स्तर पर चला गया है। पिछले ढाई साल में पहली बार विदेशी मांग में गिरावट देखने को मिली है। इसमें सितंबर 2013 के बाद सबसे तेज गिरावट देखने को मिली है। ऐसा पिछले 5-6 महीनों के दौरान इनपुट और आउटपुट कीमतों में सबसे धीमी बढ़त और महंगाई में गिरावट के बावजूद देखने को मिला है।


कम कीमत का दबाव केंद्रीय बैंक को अपनी मौद्रिक नीति को और सरल करने की जगह प्रदान कर सकता है। इसने अपनी  ब्याज दरों में 75 आधार अंकों की कटौती करके पिछले सप्ताह अपरंपरागत उपायों की एक नई परंपरा शुरू की थी।


Eliot Kerr ने आगे कहा कि अगर कोरोना का कहर इसी तरह जारी रहा तो आगे आने वाले महीनों में भारतीय मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को दूसरे देशों की तरह ही औैर बड़े झटके सहने पड़ सकते हैं।  


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