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आज़ादी के बाद भारत पर सबसे बड़ी मंदी का संकट, रिकवरी में लगेंगे 3-4 साल: क्रिसिल

क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में करेंट फिस्कल ईयर की पहली तिमाही में 25 फीसदी की बड़ी गिरावट की आशंका जताई है
अपडेटेड May 27, 2020 पर 11:43  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोना वायरस की वजह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की हालत पतली हो गई है। दुनिया के सभी देश इससे जूझ रहे हैं। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) ने कहा है कि आजादी के बाद भारत की अर्थव्यवस्था सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। उसने कहा कि आजादी के बाद यह चौथी और उदारीकरण (Liberalisation) के बाद यह पहली मंदी है जो कि सबसे भीषण है। आजादी के बाद इससे पहले 3 बार अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आई थी। लेकिन कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा झटका लगा है।


रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, कोरोनावायरस महामारी को फैलने से बचाने के लिए  लॉकडाउन लागू किया गया। जिससे अर्थव्यवस्था काफी प्रभावित हुई है। क्रिसिल ने अर्थव्यवस्था में करेंट फिस्कल ईयर में 5 फीसदी की गिरावट की आशंका जताई है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि महामारी के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था में सामान्य ग्रोथ के लिए कम से कम 3-4 साल का वक्त लग जाएगा।


क्रिसिल ने भारत की GDP के बारे में कहा कि करेंट फिस्कल ईयर की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में 25 फीसदी की बड़ी गिरावट की आशंका है। उसने कहा, वास्तविक आधार पर करीब 10 फीसदी GDP स्थायी तौर पर खत्म हो सकती है। ऐसे में हमने महामारी से पहले जो बढ़ोतरी देखी है, उसके मुताबिक रिकवरी में कम से कम 3-4 साल का वक्त लग जाएगा।


मानसून के कारण 3 बार आई मंदी


मौजूदा डेटा के मुताबिक, पिछले 69 साल में देश केवल 3 बार मंदी की चपेट में आया है। फिस्कल ईयर 1957-58, 1965-66 और 1979-80...में देश को मंदी का सामना करना पड़ा था। इन 3 सालों में मानसून की वजह से मंदी आई है। जिससे खेती बाड़ी पर काफी असर पड़ा। जिससे अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ।


क्रिसिल का मानना है कि ये मंदी उन पिछली 3 मंदी से अलग है। इसमें मानसून की तरफ से कोई झटका नहीं है। लिहाजा कृषि मामले में राहत रहेगी। मानसून सामान्य रहेगा। यह मंदी के झटके को कुछ कम कर सकता है।


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