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Indo-China Conflict: इन 12 शेयरों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर, क्या हो निवेश रणनीति

सोर्सिंग के नजरिए से देखें तो ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल, फार्मासूट्यिक्ल्स, टेलीकॉम, केमिकल्स और रेन्यूएबल पावर (solar) चीन पर सबसे ज्यादा निर्भर है।
अपडेटेड Jun 28, 2020 पर 07:23  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Kshitij Anand @kshanand


लद्दाख के गलवान वैली में चीन के साथ संघर्ष ने भारत और चीन के बीच जियोपोलिटिकल तनाव को बढ़ा दिया है।  भारत में चाइना विरोधी भावनाएं उफान मार रही है और सभी सेगमेंट में चीनी उत्पादों के बायकॉट की मांग हो रही है।


मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक सोर्सिंग के नजरिए से देखें तो ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल, फार्मास्यूटिकल्स, टेलीकॉम, केमिकल्स और रेन्यूएबल पावर (solar) चीन पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं।


इनमें से तमाम मामलों में कहीं दूसरी जगह से चाइनीज समानों का विकल्प उसी कीमत पर ढूंढना संभव नहीं दिखता। जहां हमारा  कंज्यूमर ड्यूरेबल सिस्टम चीन से आनेवाले कलपुर्जों पर निर्भर है उसी तरह फार्मा सेगमेंट चीन से आनेवाले API पर निर्भर है।


भारत का टेलीकॉम सेक्टर चीन से आनेवाले नेटवर्क उपकरणों पर निर्भर है। यही नहीं चीन से आनेवाले स्मार्टफोन भारत में 75 फीसदी से ज्यादा 4G मोबाइल फोन बाजार में काबिज हैं। अगर टेलीकॉम स्पेस में चाइनीस नेटवर्क उपकरणों पर प्रतिबंध लगता है तो उससे  Vodafone और  Bharti Airtel सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।


मोतीलाल ओसवाल की राय है कि अगर दोनों देशों में तनाव और बढ़ता है तो वर्तमान आर्थिक पुष्टिभूमि में देश में ऑपरेशनल और सप्लाई चेन जोखिम बढ़ जाएगा। भारतीय कंपनियों के लिए चाइनीज उपकरणों का तत्काल कोई विकल्प खोजना काफी महंगा और मुश्किल साबित होगा।


केमिकल सेक्टर की बात करें तो  Rallis India, Dhanuka, Sumitomo India, और  Insecticide India जैसे शेयरों पर सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ेगा। इसके अलावा  PI Industries, UPL, Coromandel और Bayer पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।


ई-कॉर्मस स्पेस पर नजर डालें तो  Info Edge पर भी भारत-चाइना तनाव का असर देखने को मिलेगा क्योंकि इसमें इन्वेस्ट करने वाली कंपनियों  Zomato और  Policy Bazaar में चाइनीज निवेश है। इसके अलावा  Paytm, Snapdeal, Ola, Swiggy, BigBasket, और Byju जैसे भारतीय टेक और ई-कॉमर्स स्टार्टअप पर भी दबाव आएगा क्योंकि इन कंपनियों में काफी बड़ी मात्रा में चाइनीज निवेश है। Tata Power में भी काफी चाइनीज निर्भरता है जिसकी वजह से इसपर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत सरकार ने इंडस्ट्रीज को निर्देश दिया है कि वह चीन से इंपोर्ट होने वाले उत्पादों की सूची तैयार करें। इसके अलावा महाराष्ट्र और हरिय़ाणा जैसे कई राज्यों से चाइनीज कंपनियों को दिए गए ठेके भी कैसेंल होने की खबरें आ रही है।


जानकारों का कहना है कि भारत और चीन के बीच तनाव का आर्थिक असर इसके सैन्य असर से कहीं ज्यादा होगा।


HDFC Securities ने देवर्ष वकील ने मनीकंट्रोल से कहा कि भारत और चीन के बीच विवाद दशकों पुराना है। दीर्घाअवधि में दक्षिण एशिया में इस विवाद का बहुत व्यापक असर देखने को मिल सकता है।


भारत और चीन के बीच बड़ी मात्रा में व्यापार होता है लेकिन इस व्यापार का पलड़ा चीन की तरफ छूका हुआ है। चीन के साथ हमारा ट्रेडडेफिस्ट लगातार बढ़ता रहा है । जानकारों का कहना है कि भविष्य में सीमा तनाव के चलते दोनों देशों के बीच कारोबार का स्वरूप काफी बदल सकता है। कोविड के बाद की दुनिया में इसमें हमें बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।


Kotak Securities के रश्मिक ओझा ने मनीकंट्रोल से बात करते हुए कहा कि आगे हमें भारत में चीन से होने वाले आयात में कमी देखने को मिल सकती है। भारत चीन से होने वाले आयात का विकल्प अपनी आत्मनिर्भरता खोज सकता है या इसके लिए दूसरे देशों का रुख कर सकता है। कोविड के  बाद की दूनिया में दूसरे देशों का रुख भी चीन के प्रति बदल सकता है और वे अपने आयातों के लिए दूसरे देशों का रुख कर सकते है। इस स्थिति में भारत के पास तमाम विदेशी निवेशकों और कंपनियों को देश में पैसे लगाने के लिए आर्कषित करने का बड़ा मौका होगा।


(डिस्क्लेमरः  Moneycontrol.com पर दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह निवेश विशेषज्ञों के अपने निजी विचार और राय होते हैं। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।


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