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ब्याज को एक्स्टर्नल बेंचमार्क से जोड़ना जरूरी, ग्राहकों को रेट कट का मिलेगा सीधा फायदा

रेपो रेट में कटौती का फायदा सीधा ग्राहकों को पहुंचाने के लिए रिजर्व बैंक ने आज बड़ा कदम उठाया है
अपडेटेड Sep 05, 2019 पर 12:34  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रेपो रेट में कटौती का फायदा सीधा ग्राहकों को पहुंचाने के लिए रिजर्व बैंक ने आज बड़ा कदम उठाया है। रिजर्व बैंक ने सभी फ्लोटिंग रेट वाले लोन को एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक करना अनिवार्य कर दिया है। यानि होम, पर्सनल या MSME के लिए लोन पर लगने वाला ब्याज इस एक्सटर्नल बेंचमार्क से तय होगा। ये एक्सटर्नल बेंचमार्क रेपो, सरकारी ट्रेजरी बिल यील्ड जैसे हो सकते हैं। यानी RBI रेपो रेट एक तरह का एक्स्टर्नल बेंचमार्क तय किया जा सकता है। FBIL के 3 महीने और 6 महीने के सरकारी ट्रेजरी बिल यील्ड भी बेंचमार्क हो सकते हैं। आरबीआई का ये सर्कुलर 1 अक्टूबर 2019 से लागू होगा।


फिलहाल बैंक MCLR पर ब्याज दर तय करते हैं। दरअसल RBI मौजूदा MCLR पर आधारित लोन दरों से खुश नहीं थी क्योंकि ग्राहकों को रेपो रेट में कटौती का उतना फायदा नहीं मिल पा रहा था जितना मिलना चाहिए था।


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