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जेपी इंफ्रा के होम बायर्स का दर्द, कट ऑफ डेट के चलते अपने घर से हुए महरूम

सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के मुताबिक दिसंबर 2019 से पहले बिल्डर पर IBC के तहत क्लेम नहीं किया था।
अपडेटेड May 26, 2021 पर 12:33  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जेपी इंन्फ्रा में करीब 10 साल पहले लाखों का निवेश करने वाले 2000 से ज्यादा होमबार्यस को अपनी गाढ़ी कमाई के अब डूबने का ख़तरा दिख रहा है। इंसोल्वेंसी कानून के तहत NCLT में चल रही आखिरी दौर की रिजॉल्यूशन प्रोसेस में वैसे होमबायर्स अपने आप को ठगा और लुटा हुआ महसूस कर रहे हैं। जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के मुताबिक दिसंबर 2019 से पहले बिल्डर पर IBC के तहत क्लेम नहीं किया था।


दिल्ली एनसीआर में जेपी इन्फ्रा के करीब दो हज़ार घर खरीददारों की सांसे अटकी हुई है। ये वो लोग हैं जिन्होने 6 दिसंबर 2019 तक अपना क्लेम दाखिल नहीं किया था। मुश्किल इसलिए खड़ी हो गई क्योंकि 24 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राहत सिर्फ उन्ही को मिलेगी जिन्होने इस तरीख के पहले अपना क्लेम दाखिल किया हो। अब ये खरीदार दर-दर गुहार लगा रहे हैं।


दरअसल, जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड नेसाल 2009-10 के आसपास करीब दो दर्जन रिहायशी हाउसिंग प्रोजेक्ट लांच किए थे लेकिन साल 2017 में कंपनी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया और मामला  NCLT में चला गया। रिजॉल्यूशन प्रक्रिया शुरु हुई और दो कंपनियों ने इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए अपनी बिड सौंपी। एक थी सरकारी कंपनी NBCC और दूसरी, प्राईवेट कंपनी सुरक्षा ग्रुप लेकिन होमबायर्स को बड़ा झटका तब लगा जब क्लेम के लिए सुप्रीम कोर्ट 6 दिसंबर 2019 की कट ऑफ डेट तय कर दी।  अब 2143 होमबार्यस ऐसे हैं जिनके लिए ये कटऑफ डेट किसी सदमे से कम नहीं है।


हांलाकि सुप्रीम कोर्ट की कट ऑफ डेट बीत जाने के बावजूद भी 190 होमबायर्स ने इसलिए क्लेम दाखिल किया है। कारण NCLT के निर्देश और सुरक्षा ग्रुप की रिवाईज्ड बिड ने होमबार्यस को एक उम्मीद दी है। जिसमें कहा गया है कि अनक्लेम्ड होमबार्यस को राहत दी जाएगी। हालांकि कंपनी ने इस मुद्दे पर फिलहाल आधिकारिक बयान देने से इंकार किया है। (रिवाइज्ड बिड की एक्सक्लूसिव कॉपी सीएनबीसी आवाज़ के पास मौजूद है)


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