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सड़क पर आई खाकी और काले कोट की लड़ाई, क्या करेगी सरकार!

कानून के रक्षक और कानून के जानकार आपस में भिड़ गए हैं और लड़ाई इंतनी लंबी खिंच गई हैं कि अब कोई पीछे हटने को तैयार नहीं है।
अपडेटेड Nov 07, 2019 पर 12:39  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कानून के रक्षक और कानून के जानकार आपस में भिड़ गए हैं और लड़ाई इंतनी लंबी खिंच गई हैं कि अब कोई पीछे हटने को तैयार नहीं है, राजधानी दिल्ली को पुलिस और वकीलों ने बंधक बना लिया है, बीते दो नवंबर से दोनों की लड़ाई सड़कों पर हो रही है, कल पुलिस धरना देकर बैठी थी तो आज वकील धरने पर बैठे हैं, और सरकार बैठ के तमाशा देख रही है, लेकिन अहम की इस लड़ाई में पिस रहा है आम आदमी जिसकी कोर्ट में सुनवाई नहीं हो रही है, तारीख लेकर वापस जाना उसकी नियति बन गई है।


दिल्ली में वकीलों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। दो नवंबर को दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में कार पार्किंग को लेकर पुलिस और वकीलों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। मामले ने तूल पकड़ा और कानून के रखवाले एक दूसरे के दुश्मन बन गए। दोनों के बीच का झगड़ा सड़क पर आ गया। दिल्ली की सड़कों पर वकीलों ने खूब तांडव किया। वहीं पूरा पुलिस महकमा अपनी मांगों को लेकर पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर ही धरने पर बैठ गया। करीब 10 घंटे के बाद दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने उनकी ज्यादातर मांगें मानी। तब जाकर पुलिसवाले काम पर लौटे।


लेकिन वकील अभी भी अपनी मांगों पर अड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट को छोड़कर दिल्ली की सभी निचली अदालतों में काम ठप है और प्रदर्शन जारी है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन पुलिस वालों पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं लेकिन दोषी वकीलों के खिलाफ एक्शन की बात भी कह रहे हैं।


वकील और पुलिस की लड़ाई में आम जनता पिस रही है। पिछले दो दिन में दिल्ली की अदालतों में करीब 40 हजार मुकदमों की सुनवाई नहीं हो पाई। इनकी चिंता किसी को नहीं है।


दिल्ली हाईकोर्ट ने वकीलों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं करने का आदेश दिया था। इसके अलावा हाईकोर्ट के पूर्व जज एस पी गर्ग की अध्यक्षता में इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। जस्टिस गर्ग को सीबीआई, सीवीसी और इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर असिस्ट करेंगे। जांच 6 हफ्तों के अंदर पूरी करके रिपोर्ट कोर्ट में देनी होगी। गृह मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार के लिए याचिका डाली थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।


कोर्ट ने साकेत कोर्ट मामले में पुलिस की उस अर्जी को भी खारिज कर दिया जिसमें वकीलों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की गई थी। सवाल ये है कि पुलिस और वकीलों के बीच खुली लड़ाई के लिए कौन जिम्मेदार है? दोनों पक्षों के बीच झगड़े को शांत कराने की सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल क्यों नहीं हुई? सवाल ये भी है कि क्या कानून के रखवालों को अपने हाथ में कानून लेने का अधिकार है? या ये वर्चस्व की लड़ाई है जिसमें किसी के आगे झुकना शान के खिलाफ है? और इन दोनों पक्षों के टकराव में आम जनता क्यों पिसे?


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