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अमेरिका- चीन ट्रेड वॉर : जानिए टैरिफ बढ़ने से क्या होगा असर

प्रकाशित Fri, 10, 2019 पर 11:18  |  स्रोत : Moneycontrol.com

दुनिया के दो दिग्गज अर्थव्यवस्थाओं वाले देश अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की बयानबाजी से मामला और गरम हो रहा है। ट्रंप ने चीन के 200 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ बढ़ाने की बात कही थी। जिसे आज से ट्रंप सरकार लागू कर देगा। एक छोर पर बातचीत चल रही है, तो दूसरे छोर ट्रंप अपना काम कर रहे है।


ट्रंप सरकार की तरफ से एडमिनिस्ट्रंशन (प्रशासन) को किसी भी तरह के संकेत नहीं मिलने पर रात 12 बजे से अमेरिकी प्रशासन ने 10 फीसदी टैरिफ बढ़ाकर 25 फीसदी कर देगा।
 
सीबीपी के प्रवक्ता ने बताया कि आज रात 12 बजे के बाद चीनी पोर्टेस और एयरपोर्ट्स से निकलने वाले प्रोडक्ट्स पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाया जायेगा।


ट्रप ने चीन के 200 अरब डॉलर के सामान पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने के लिए 5 दिनों से कम का टाइम दिया था।


इस टैरिफ को खत्म करने के लिए अमेरिका और चीन पिछले दो दिनों से बातचीत कर कर रहे हैं। लेकिन अभी तक किसी भी नतीजे पर बात नहीं पहुंची।


दरअसल, चीनी उत्पादों का अमेरिका में दखल बहुत ज्यादा है और उन पर 25 फीसदी का टैरिफ लगने से निम्न मध्यवर्गीय अमेरिकी अपनी कुछ जरूरतें पूरी नहीं कर पाएंगे। टैरिफ का असर इंटरनेट मॉडेम, राउटर और दूसरे डाटा ट्रांसमिशन पर पड़ेगा। साथ ही फर्नीचर, लाइटिंग प्रोडक्ट्स, ऑटो पार्ट्स, वैक्यूम क्लीनर बिल्डिंग मैटीरियल्स पर भी टैरिफ का असर दिखेगा। 



कंज्यूमर टेकनोलॉजी एसोसिएशन के चीफ एग्जीक्यूटिव गैरी शापिरो ने कहा कि, ट्रंप के दावे के मुताबिक टैरिफ का भुगतान अमेरिकी कंज्यूमर्स और बिजनेसमैन करेंगे न कि चीन करेगा।


शापिरो ने अपने बयान में आगे कहा कि हमारी इंडस्ट्री 18 मिलियन अमेरिकी जॉब को सपोर्ट करता है। लेकिन टैरिफ बढ़ाने से अमेरिका को भी नुकसान है। साथ ही छोटे बिजनेस मैन और स्टार्टप्स इस टैरिफ को नहीं झेल सकते, लिहाजा उन्हें भारी नुकसान होने की उम्मीद है।


उधर जानकारों का मानना है कि टैरिफ बढ़ाए जाने से बड़े कारोबार में तीन से चार महीने बाद असर पड़ेगा। लेकिन छोटे और मझोले व्यापारियों पर इसका तुरंत असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। 


आपको बता दें कि, इस बातचीत का नेतृत्व चीन की तरफ से, चीन के उप प्रधानमंत्री लिउ और अमेरिका की तरफ से इसमें यूएस ट्रेड रीप्रजेंटेटिव रॉबर्ट लाइटीजर और ट्रेजरी सेक्रेटरी यानी वित्त मंत्री स्टीवन म्नुछिन कर रहे हैं। 



बातचीत से पहले ही अमेरिका ने आरोप लगाया है कि पिछले दौर में जिन मसलों पर सहमति बनी थी, उसको लेकर चीन पीछे हट रहा है।